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सांसद-विधायक का दल-बदल जनादेश का अपमान, रद्द होनी चाहिए सदस्यता: नौशाद सिद्दीकी

कोलकाता, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। आईएसएफ चेयरमैन नौशाद सिद्दीकी ने प्रदेश के कई राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य के घर पर हुए हमले और एनसीपीआई से जुड़े 20 सांसदों और बंगाल के 10 विधायकों के मामले को लेकर अपनी बात रखी। सिद्दीकी ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी विपक्षी आवाज या वकील पर हमला नहीं होना चाहिए।
 

कोलकाता, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। आईएसएफ चेयरमैन नौशाद सिद्दीकी ने प्रदेश के कई राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य के घर पर हुए हमले और एनसीपीआई से जुड़े 20 सांसदों और बंगाल के 10 विधायकों के मामले को लेकर अपनी बात रखी। सिद्दीकी ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी विपक्षी आवाज या वकील पर हमला नहीं होना चाहिए।

विकास रंजन भट्टाचार्य के घर पर मले को लेकर नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि किसी व्यक्ति का दूसरी राजनीतिक पार्टी से संबंध होना अलग बात है, लेकिन अगर विपक्ष की ओर से कोई बात कही जाती है तो उसके जवाब में हमला क्यों किया जाए। सिद्दीकी ने दावा किया कि इससे पहले कोलकाता के सेशन कोर्ट में अधिवक्ताओं और हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता पर भी हमला हुआ था।

सिद्दीकी ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से कथित तौर पर ऐसे हमलों में शामिल समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार यह सोचकर ऐसे लोगों को छोड़ देती है कि वे उसके पक्ष में काम कर रहे हैं, तो भविष्य में यही लोग सरकार के खिलाफ भी खड़े हो सकते हैं।

नौशाद सिद्दीकी ने ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान विधानसभा में विपक्ष के व्यवहार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब ममता बनर्जी बोलना शुरू करती थीं, तब भाजपा के सभी सदस्य सदन छोड़कर चले जाते थे। सिद्दीकी ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों की तुलना उस दौर से करते हुए कहा कि राजनीतिक असहमति के बावजूद विपक्ष के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई या हमला नहीं होना चाहिए।

एनसीपीआई से जुड़े 20 सांसदों और 10 विधायकों के खिलाफ मामले का जिक्र करते हुए सिद्दीकी ने कहा कि इस मुद्दे पर सुनवाई हो रही है। अगर कानून अपने रास्ते पर चलता है तो आगे यह देखना होगा कि संबंधित लोगों की सदस्यता को लेकर क्या फैसला होता है और प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। सिद्दीकी ने चुनाव में मिले जनादेश और पार्टी बदलने के मुद्दे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कोई उम्मीदवार एक चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ता है और मतदाता उसी चिह्न के आधार पर उसे वोट देते हैं। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद दूसरी पार्टी में जाने को उन्होंने मतदाताओं के साथ गलत व्यवहार बताया।

उन्होंने कहा कि अगर संबंधित नेताओं को अपनी सदस्यता पर इतना विश्वास है तो उन्हें इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव मैदान में उतरना चाहिए। मुर्शिदाबाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां लोगों ने बीजेपी के खिलाफ वोट दिया था, लेकिन चुनाव के बाद तीन सांसद एनसीपीआई में चले गए और जिस पार्टी में वे गए, वह एनडीए का हिस्सा बन गई।

सिद्दीकी ने कहा कि मतदाता इस स्थिति का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कानूनी तौर पर संबंधित नेताओं की सदस्यता समाप्त होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में किसी पार्टी या चुनाव चिह्न को देखकर मतदाताओं ने अपना समर्थन दिया था।

--आईएएनएस

पीएसके/वीसी