संसद से लेकर उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और राम मंदिर ट्रस्ट तक, सुरेंद्र राजपूत ने भाजपा को घेरा
लखनऊ, 19 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने संसद के संचालन, उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारें जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा से बच रही हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सही ढंग से संचालन नहीं कर रही हैं।
संसद के आगामी मानसून सत्र के सुचारु संचालन को लेकर सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों से भाजपा लगातार संसद की कार्यवाही बाधित करती रही है। भाजपा यह तो खुद सदन में व्यवधान पैदा करती है या ऐसा माहौल बनाती है जिससे जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा ही न हो सके।
उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि भाजपा जनता के मुद्दों को संसद में आने ही नहीं देती। अगर विपक्ष को जनता की समस्याएं उठाने से रोका जाएगा तो यह माना जाएगा कि भाजपा की लोकतंत्र में कोई आस्था नहीं है।"
वहीं, उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि यदि सरकार का दावा है कि राज्य से माफिया खत्म हो चुका है तो फिर रोज हत्या की घटनाएं क्यों हो रही हैं। उन्होंने पूछा कि प्रदेश में लगातार सांप्रदायिक तनाव क्यों देखने को मिलता है और संभल, बहराइच तथा कासगंज जैसे जिलों में दंगे क्यों होते हैं।
उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में 396 से अधिक दंगों का जिक्र किया गया है। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश महिलाओं और दलितों के लिए सबसे असुरक्षित राज्यों में शामिल है। प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है और सरकार इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है।
राम मंदिर ट्रस्ट के मुद्दे पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मौजूदा ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह ट्रस्ट राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहा है।
सुरेंद्र राजपूत ने मांग की कि वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर इसे पूरी तरह धार्मिक ट्रस्ट के रूप में पुनर्गठित किया जाए। उन्होंने कहा कि नए ट्रस्ट में शंकराचार्यों, रामानुजाचार्यों और विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि राम मंदिर का संचालन धार्मिक परंपराओं और व्यापक प्रतिनिधित्व के साथ किया जा सके।
--आईएएनएस
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