संजय राउत के 'सुप्रीम कोर्ट जलाने' वाले पोस्ट पर सियासी घमासान, भाजपा-शिवसेना ने बताया राष्ट्रविरोधी
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। भाजपा और शिवसेना के नेताओं ने संजय राउत को राष्ट्रविरोधी बताया।
दरअसल, संजय राउत ने तिराना, अल्बानिया में हुए सरकार विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए 'एक्स' पर लिखा था, "अल्बानिया के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया है। लोग इसलिए गुस्से में थे क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद कर रहा था। प्रदर्शन कर रही जनता ने संसद, सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों के घरों पर भी हमला किया है। सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए, खासकर भारत को।"
राउत के इस पोस्ट के बाद भाजपा और शिवसेना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश से लोनी के विधायक नंद किशोर गुर्जर ने संजय राउत के पोस्ट को राष्ट्रविरोधी बताया है। उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस से राउत की गिरफ्तारी की मांग की है और देश भर के लोगों से दशहरा पर राउत का पुतला जलाने की अपील की।
गुर्जर ने कहा, "राहुल गांधी और अखिलेश यादव सुप्रीम कोर्ट में गए, जिससे यह साफ हो गया है कि अगर हमारी सूझबूझ नहीं होती और शक्ति नहीं होती तो वे सुप्रीम कोर्ट को जलाने का प्रयास करते। मैंने सीजेआई से पहले ही निवेदन किया था कि राहुल गांधी के ऊपर मुकदमा दर्ज हो। संजय राउत उसी का हिस्सा हैं और वे रावण हैं। उनके बयान को भारत जैसा देश बर्दाश्त नहीं कर सकता। राउत अगर दिल्ली में आते हैं, तो उनका जवाब दिया जाएगा। उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।"
वहीं, ठाणे से शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने कहा, "अमित शाह एनडीए के बड़े नेता हैं। राउत की पार्टी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के दरवाजे के बाहर बैठी है। बाला साहब ठाकरे ने कहा था कि उनकी पार्टी कभी भी कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी और वक्त आया तो वो पार्टी बंद कर देंगे। लेकिन, संजय राउत कांग्रेस की चौखट के बाहर बैठे रहते हैं। क्या सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी संजय राउत के नेता हैं। पहले वे पवार साहब की गुलामी करते थे, अब गांधी परिवार की कर रहे हैं।"
दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली ने भी राउत की टिप्पणियों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, "भारतीय संविधान विरोध प्रदर्शन करने की इजाजत देता है, लेकिन विरोध में हिंसा नहीं होनी चाहिए। संविधान में हिंसा के जरिए सरकार बदलने की कोई गुंजाइश नहीं है। इसके लिए एक चुनावी प्रक्रिया है। राजनीतिक दलों को चाहे वह कांग्रेस हो या कोई और पार्टी, इस पर जवाब देना होगा। इसी चुनावी प्रक्रिया, इसी चुनाव आयोग, इन्हीं चुनाव आयुक्तों और इन्हीं इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के जरिए केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में सत्ता बदली है, जहां अभी कांग्रेस सत्ता में है और तमिलनाडु में भी, जहां विपक्ष सत्ता में है।"
वहीं, सपा सांसद एसटी हसन ने कहा, "हमारा मानना है कि हिंदुस्तान को बांटने का ख्याल लोग अपने दिलों से निकाल लें। ऐसा किसी के अंदर हिम्मत नहीं है। वैचारिक रूप से हिंदुस्तान के अंदर भले ही मतभेद हों, लेकिन जहां पर देश का मामला आता है, वहां पर हम एक हैं।"
--आईएएनएस
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