संगीत की दुनिया के 'मेमोरी कंडक्टर', हर सुर-ताल याद… बिना स्कोर देखे चला देते हैं पूरी सिम्फनी
मुंबई, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। मशहूर संगीत निर्देशक जुबिन मेहता की पहचान उनकी याददाश्त और सादगी से जुड़ी है। वह कई बार ऑर्केस्ट्रा बिना किसी लिखे हुए म्यूजिक स्कोर के भी चला लेते हैं। उन्हें हर सुर, हर ताल और हर बदलाव याद रहता है। इस खासियत को लेकर दुनिया उन्हें 'मेमोरी कंडक्टर' भी कहती है। यही चीज उन्हें दुनिया के सबसे खास कंडक्टर्स में से एक बनाती है।
जुबिन मेहता का जन्म 29 अप्रैल 1936 में मुंबई में हुआ था। उनके घर में पहले से ही संगीत का माहौल था। उनके पिता मेहली मेहता एक मशहूर वायलिन वादक थे और उन्होंने बॉम्बे सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा शुरू किया था। जुबिन ने शुरुआत में मेडिकल की पढ़ाई करने का फैसला लिया, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा। उनका असली शौक संगीत था, इसलिए उन्होंने पढ़ाई छोड़कर संगीत को अपना करियर बना लिया।
साल 1954 में वे विएना चले गए, जो संगीत सीखने के लिए दुनिया का बहुत बड़ा केंद्र माना जाता है। वहां उन्होंने मशहूर शिक्षक हांस स्वारोव्स्की से कंडक्टिंग की ट्रेनिंग ली। यह ट्रेनिंग आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने मेहनत और लगन से इसे पूरा किया। 1958 में उन्होंने लिवरपूल इंटरनेशनल कंडक्टिंग कॉम्पिटिशन में जीत हासिल की, जिसके बाद उन्हें पूरी दुनिया में पहचान मिलने लगी।
इसके बाद उनका करियर बहुत तेजी से आगे बढ़ा। सिर्फ 25 साल की उम्र में वे मॉन्ट्रियल सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा के म्यूजिक डायरेक्टर बन गए। यह अपने समय का बड़ा रिकॉर्ड था। इसके बाद उन्होंने लॉस एंजिल्स फिलहार्मोनिक, न्यूयॉर्क फिलहार्मोनिक और इजराइल फिलहार्मोनिक जैसे बड़े ऑर्केस्ट्रा के साथ काम किया। इजराइल फिलहार्मोनिक के साथ उनका रिश्ता काफी गहरा था। उन्हें इस ऑर्केस्ट्रा का म्यूजिक डायरेक्टर बना दिया गया।
यहीं से उनकी 'मेमोरी कंडक्टर' वाली पहचान और मजबूत हुई। कई बार ऐसा होता था कि वह पूरी सिम्फनी बिना कागज देखे कंडक्ट करते थे। यह देख कई लोग हैरान रह जाते थे कि कोई इंसान इतना कुछ कैसे याद रख सकता है। संगीतकारों के लिए उनके साथ काम करना एक अलग अनुभव होता था, क्योंकि उन्हें हर चीज साफ और सटीक मिलती थी।
जुबिन मेहता हमेशा कहते थे कि कंडक्टिंग सिर्फ हाथ हिलाना नहीं है, बल्कि संगीत को महसूस करना है। उनका मानना था कि अगर कंडक्टर संगीत को दिल से समझे, तो ऑर्केस्ट्रा खुद ही सही तरीके से बजने लगता है। उनकी यही सोच उन्हें बाकी कंडक्टर्स से अलग बनाती है।
अपने लंबे करियर में उन्होंने भारत में भी कई बार परफॉर्म किया। उन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे बड़े सम्मान दिए हैं। इसके अलावा उन्हें दुनिया भर में कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले।
--आईएएनएस
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