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सनातन धर्म से ही भारत में सहिष्णुता और सह-अस्तित्व, धर्म की रक्षा जरूरी: भाजपा

कुरनूल, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा प्रवक्ता विनुशा ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के धर्म और देश को लेकर दिए गए बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था में सनातन धर्म के मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और देश की रक्षा के लिए धर्म की रक्षा जरूरी है।
 

कुरनूल, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा प्रवक्ता विनुशा ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के धर्म और देश को लेकर दिए गए बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था में सनातन धर्म के मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और देश की रक्षा के लिए धर्म की रक्षा जरूरी है।

विनुशा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मोहन भागवत ने कहा है कि अगर धर्म संकट में होगा तो देश भी संकट में होगा और यह बात सही है। भारत ने लंबे समय से सनातन परंपराओं का पालन किया है, जिसमें सहिष्णुता, प्रकृति के सम्मान और सभी के प्रति सम्मान की भावना पर जोर दिया जाता है। भारत में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोगों को सम्मान के साथ रहने का अवसर मिला है।

यहूदी और पारसी समुदायों का उदाहरण देते हुए विनुशा ने कहा कि जिन समुदायों ने इतिहास में कई जगहों पर उत्पीड़न का सामना किया, उन्हें भारत में सुरक्षित वातावरण मिला। आज भी बौद्ध, सिख, ईसाई और मुस्लिम समुदाय के लोग भारत में रहते हैं और देश की विविधता इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में अलग-अलग विचारों और आस्थाओं के साथ सह-अस्तित्व की भावना रही है। सनातन धर्म की यही विशेषता समाज में सहिष्णुता और एक-दूसरे के सम्मान की भावना को बढ़ावा देती है।

उन्होंने भारत के पड़ोसी देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश कभी भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा रहे हैं, लेकिन वर्तमान में वहां हिंदू आबादी बहुत कम है। विनुशा ने इन देशों की मौजूदा परिस्थितियों को भारत से अलग बताते हुए कहा कि वहां शांति, सुरक्षा और विकास से जुड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।

विनुशा ने आगे कहा कि भारत में संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ धार्मिक विविधता भी मौजूद है। उन्होंने इसे देश की सामाजिक संरचना और सनातन परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि भारत की रक्षा के लिए सनातन धर्म के मूल्यों की रक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश की संस्कृति में सहिष्णुता, प्रकृति के सम्मान और विभिन्न समुदायों के साथ मिलकर रहने की भावना को बनाए रखना जरूरी है। इन्हीं मूल्यों के कारण भारत की सामाजिक विविधता और सह-अस्तित्व की परंपरा मजबूत हुई है।

--आईएएनएस

पीएसके