सनातन धर्म और देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने वालों पर बरसे बाबा रामदेव
हरिद्वार, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। देवी-देवताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वालों पर योग गुरु बाबा रामदेव बुधवार को जमकर बरसे। हरिद्वार के कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बाबा रामदेव ने सनातन धर्म के देवी-देवताओं की छवि धूमिल करने और धार्मिक ग्रंथों को लेकर कथित तौर पर भ्रामक एवं आपत्तिजनक बातें प्रचारित करने वालों पर जमकर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता, भगवान श्रीकृष्ण और महायोगी भगवान शिव को लेकर की जा रही कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कड़ा विरोध जताया। बाबा रामदेव ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म की परंपराओं, आस्थाओं और धार्मिक ग्रंथों को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम का तथ्यात्मक जवाब दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पतंजलि की ओर से आयोजित भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन में इन विषयों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए संबंधित दावों की वास्तविकता सामने रखी जाएगी।
बाबा रामदेव ने सनातन धर्म और हिंदू देवी-देवताओं को लेकर कथित तौर पर की जा रही अभद्र टिप्पणियों तथा धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या में मनमाने बदलाव के आरोपों पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा धर्मशास्त्रों और पुराणों के संदर्भ में फेरबदल कर ऐसी बातें प्रस्तुत की जा रही हैं, जिनसे सनातन धर्म की मान्यताओं और आराध्य देवी-देवताओं की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
बाबा रामदेव ने भगवान श्रीराम और माता सीता को मांसाहार एवं मदिरापान से जोड़कर प्रस्तुत किए जाने, भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य महारास को अपभ्रंश एवं दोषपूर्ण रूप में दिखाने और महायोगी भगवान शिव को नशे से जोड़कर प्रस्तुत करने जैसी बातों पर विरोध जताया। उन्होंने ऐसे प्रयासों को सनातन धर्म की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए इनकी निंदा की।
उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों, प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन धर्म से जुड़े विषयों पर तथ्यों एवं प्रमाणों के आधार पर चर्चा होना आवश्यक है। आस्था से जुड़े विषयों को लेकर भ्रामक धारणाएं फैलाने के बजाय उनके वास्तविक संदर्भों को समझा जाना चाहिए।
स्वामी रामदेव ने जानकारी दी कि पतंजलि की ओर से आयोजित तीन दिवसीय भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन में इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिवेशन के माध्यम से प्राचीन भारतीय ज्ञान, धर्मशास्त्रों और सनातन परंपराओं से जुड़े तथ्यों को सामने रखते हुए विभिन्न दावों की पड़ताल की जाएगी।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए रामदेव ने कहा, "पहले यह दावा किया गया कि आर्य बाहर से आए थे। खैर, मैंने पूरी दुनिया घूमी है और मैंने हर जगह लोगों से पूछा: 'क्या आर्य आपके यहां से भारत आए थे?' उन्होंने जवाब दिया, 'नहीं, इंडिया से लोग हमारे यहां आए। आज भी, माइग्रेंट कौन है? कौन माइग्रेट करता है जो गरीब हैं? माइग्रेशन तीन तरह से होता है: या तो कोई विद्वान दुनिया भर में घूमता है, जैसा कि कहावत है, 'एक राजा अपने देश में पूजनीय होता है लेकिन एक विद्वान हर जगह पूजनीय होता है,' तो कोई ज्ञान फैलाने के लिए माइग्रेट करता है, जैसे हम योग को प्रमोट करने के लिए दुनियाभर में घूमते हैं।"
उन्होंने कहा, "कोई माइग्रेट करता है क्योंकि उसे अपने देश में नौकरी नहीं मिलती, इसलिए वह मिडिल ईस्ट, अमेरिका, यूरोप या ऑस्ट्रेलिया में काम ढूंढने जाता है। या कोई व्यक्ति बड़े बिजनेस वेंचर के लिए माइग्रेट करता है। तो ये नैरेटिव, पहले हमें यह कहकर बांटना कि आर्य बाहर से आए थे, फिर 'ओरिजिनल रेजिडेंट' के कॉन्सेप्ट को आगे बढ़ाना, और 'ब्राह्मणों, इंडिया छोड़ो' जैसे नारों से ब्राह्मणों को टारगेट करना, ये सभी झूठे नैरेटिव इस देश में फैलाए जा रहे हैं। हालांकि हम एक साफ बात कह रहे हैं कि आर्य बाहर से नहीं आए थे।"
उन्होंने कहा, "हाल के दिनों में, एक और भी बुरा बयान दिया गया, जिसमें दावा किया गया कि राम अमीरों के भगवान हैं, उन्हें 56 तरह के पकवान, प्रसाद और शृंगार चढ़ाए जाते हैं जबकि शिव गरीबों के भगवान हैं। देखो, इन बुरे लोगों ने तो भगवानों में भी अमीर और गरीब का फर्क कर दिया है! ऐसी बातें बनाई जा रही हैं।"
उन्होंने कहा, "पहले, वे कहते हैं कि राम, कृष्ण, हनुमान और शिव कभी थे ही नहीं, सब कुछ मनगढ़ंत है। अब उन पर आरोप लगाने के लिए, वे कहते हैं कि राम कभी थे ही नहीं, कृष्ण कभी थे ही नहीं, शिव कभी थे ही नहीं, देवी-देवता कभी थे ही नहीं, ब्रह्मा, विष्णु और महेश कभी थे ही नहीं; दूसरी तरफ, वे उन पर झूठे आरोप लगाते हैं। हालांकि, जन्म, डीएनए और वंश के हिसाब से, पूरी दुनिया में अभी भी 150 करोड़ से ज्यादा सनातन अनुयायी हैं।
उन्होंने कहा कि अगर हम अखंड भारत को देखें, तो आबादी 200 करोड़ से ज्यादा है। इतिहास और वंश, अगर आप भारत में 99 प्रतिशत मुसलमानों से उनके पूर्वजों के बारे में पूछेंगे, तो वे मानेंगे, 'हम धर्म बदलने वाले हैं; हमारे पूर्वज ऋषि, महर्षि, देवी-देवता और हिंदू सनातनी वैदिक अनुयायी थे।' वे इस बात को मानते भी हैं।
उन्होंने कहा, "सनातन धर्म पर सुनियोजित हमले किए जा रहे हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और माता सीता को शराब और मांस खाने वाला दिखाकर; आदियोगी, महायोगी, परम चेतना और दुनिया की सभी इच्छाओं और जुनून पर जीत हासिल करने वाले भगवान शिव को नशेड़ी, गांजा पीने वाले और भांग पीने वाले के तौर पर दिखाकर; योगेश्वर भगवान कृष्ण पर रासलीला के नाम पर ऐशो-आराम करने का आरोप लगाकर; भगवान ब्रह्मा पर अपनी ही बेटी के साथ गलत काम करने का आरोप लगाकर और देवताओं को गलत काम करने वाला कहकर सनातन धर्म के अंदर कुछ खास किताबों का सहारा लेकर, पिछले 1,000 सालों में मुगल काल और ब्रिटिश काल में सनातन धर्म के विरोधियों और धर्मद्रोही लोगों ने सनातन धर्म को नीचा दिखाने के लिए हमारे धर्मग्रंथों में कुछ बातें जोड़ीं।"
--आईएएनएस
एसडी/पीएम
