संवैधानिक मर्यादा भूलकर सिर्फ सत्ता की राजनीति कर रही एनडीए : मनोज झा
पटना, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 बिल पारित न होने पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद मनोज झा ने प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन में पद की गरिमा का पालन नहीं किया गया और उसका फोकस महिला आरक्षण जैसे मुद्दे पर कम तथा राजनीतिक दलों को निशाना बनाने पर अधिक था।
उन्होंने कहा कि यह संबोधन उस संवैधानिक पद की अपेक्षित मर्यादा के अनुरूप नहीं था, खासकर ऐसे समय में जब दो राज्यों में चुनावी प्रक्रिया चल रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को लेकर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी दिखाई दी। उनके अनुसार, 16 अप्रैल की आधी रात को विधेयक का नोटिफिकेशन जारी किया गया और परिसीमन के फॉर्मूले को लेकर किसी व्यापक राजनीतिक सहमति की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
उन्होंने मांग की कि इस विषय पर एक और सत्र बुलाकर विधेयक को फिर से पेश किया जाए और सभी पक्षों से चर्चा की जाए।
सांसद ने यह भी टिप्पणी की कि राष्ट्र के नाम संबोधन का स्वर लगातार बदलता दिख रहा है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसरों पर राष्ट्र के नाम संदेश में संतुलन और गरिमा अपेक्षित होती है, लेकिन इस बार संबोधन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अधिक प्रभावित दिखाई दिया।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से सरकार काम कर रही है, वह देश के लिए सही नहीं है। इससे देश में नुकसान हो रहा है। जनता में भ्रम फैलाने का काम भी सरकार कर रही है। इससे कुछ होने वाला नहीं है क्योंकि जनता को पता है कि देश में भाजपा सरकार क्या कर रही है, कौन सी सरकार फायदे का काम करती है और कौन सी नुकसान का काम करती है।
बता दें कि लोकसभा में विधेयक के खारिज होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एक ओर जहां सरकार इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक प्रयास बता रही है। वहीं, विपक्ष इसे प्रक्रियागत खामियों और राजनीतिक उद्देश्य से जोड़कर देख रहा है।
--आईएएनएस
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