समुद्री सुरक्षा से वैज्ञानिक सहयोग तक, हिंद-प्रशांत के देशों का दिल्ली में महामंथन
नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। भारत में फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान और मालदीव आदि कई देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री निगरानी व सुरक्षा व्यवस्था लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने से लेकर समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण ढांचे की सुरक्षा तक, चुनौतियों से निपटने में विज्ञान और तकनीक की भूमिका अहम मंथन किया गया।
श्रीलंका, फिलीपींस और नॉर्वे के राजनयिकों ने भी ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद-2026 (आईपीआरडी-2026) में हिस्सा लिया। नई दिल्ली में 3 नवंबर से शुरू हुए इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ और शिक्षाविद इस बात पर विचार कर रहे हैं कि वैज्ञानिक शोध, नई तकनीक और शैक्षणिक साझेदारी को क्षेत्रीय सहयोग की ताकत कैसे बनाया जाए।
इस बार सम्मेलन का विषय ‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अकादमिक सहयोग’ रखा गया है। सम्मेलन की शुरुआत नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के अध्यक्ष और नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी (सेवानिवृत्त) के उद्घाटन संबोधन से हुई। भारतीय नौसेना अपने नॉलेज सहयोगी नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (एनएमएफ) के साथ मिलकर इस संवाद का आयोजन कर रही है। सम्मेलन के पहले दिन समुद्री सुरक्षा और शैक्षणिक सहयोग से जुड़े दो प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई।
पहले दिन खास तौर पर समुद्री सुरक्षा की महत्वपूर्ण चुनौती पर यह विमर्श केंद्रित रहा। इसमें समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण ढांचे की सुरक्षा और समुद्री गतिविधियों की निगरानी पर विचार किया गया। समुद्री व्यापार की सुरक्षा के साथ-साथ पानी के नीचे मौजूद ढांचे की निगरानी के लिए देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान कितना जरूरी है, इस पर विस्तार से चर्चा हुई।
वाइस एडमिरल तरुण सोबती (सेवानिवृत्त), पूर्व उप नौसेना प्रमुख की अध्यक्षता में हुए इस सत्र में हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय समुद्री क्षेत्र जागरूकता साझेदारी (आईपीएमडीए) के अवसरों और चुनौतियों पर भी बात हुई। चर्चा का एक अहम पहलू समुद्र के भीतर होने वाली गतिविधियों की जानकारी साझा करने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर सहयोगी व्यवस्था विकसित करना रहा। हिंद महासागर आयोग ने भी महत्वपूर्ण समुद्री ढांचे की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर अपने विचार रखे। सम्मेलन के पहले सत्र में हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच शैक्षणिक और शोध सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
वाइस एडमिरल संजय महिंदरू (सेवानिवृत्त), पूर्व उप नौसेना प्रमुख ने इसका संचालन किया। फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान और मालदीव के प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया। चर्चा में हिंद महासागर के तटीय शहरों के विश्वविद्यालयों को एक व्यापक शैक्षणिक नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाएं तलाशी गईं। इसके साथ ही सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में साझा शोध, विश्वविद्यालयों और विशेषज्ञ संस्थानों के बीच सहयोग तथा सरकारों के साथ बेहतर तालमेल बनाने पर भी विचार हुआ।
इस दौरान ‘सी ब्लाइंडनेस एंड मैरीटाइम हेरिटेज इन इंडिया’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक भारत में समुद्र के प्रति जागरूकता और समुद्री विरासत से जुड़े विषयों पर केंद्रित है। श्रीलंका, फिलीपींस और नॉर्वे के राजनयिकों ने भी लिया हिस्सा पहले दिन ‘सहयोग का संवाद’ नाम से विशेष राजनयिक बातचीत भी हुई। इसमें श्रीलंका की उच्चायुक्त महिशिनी कोलोन, फिलीपींस के राजदूत जोसेल एफ. इग्नासियो और नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर शामिल हुईं।
इस संवाद की मेजबानी नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के महानिदेशक वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान (सेवानिवृत्त) ने की। पहले दिन की चर्चाओं के दौरान प्रतिभागियों ने विज्ञान और तकनीक में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने तथा शैक्षणिक साझेदारी के माध्यम से ज्ञान साझा करने के लिए कई व्यावहारिक नीतिगत सुझाव भी दिए।
--आईएएनएस
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