स्वदेशी डीएससी ए24 जहाज समुद्री ऑपरेशन के लिए तैयार, कोलकाता में लॉन्च
कोलकाता, 2 अगस्त (आईएएनएस)। आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के तहत भारतीय नौसेना ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (डीएससी) परियोजना का पांचवां और अंतिम पोत रविवार को कोलकाता स्थित टीटागढ़ शिपयार्ड में लॉन्च किया गया। यह समारोह नौसेना की परंपराओं और औपचारिक रीति-रिवाजों के अनुरूप भव्य तरीके से आयोजित किया गया।
भारतीय नौसेना के कार्मिक प्रमुख वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह की उपस्थिति में पोत को पानी में उतारा गया। इस अवसर पर भारतीय नौसेना और एम/एस टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
डीएससी ए24, डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट प्रोजेक्ट का पांचवां जहाज है। इसे यार्ड 329 के नाम से भी जाना जाता है। इस जहाज का निर्माण टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड, कोलकाता द्वारा आईआरएस और नेवल नियमों के अनुसार किया गया है।
जहाज में कैटामरन-हल फॉर्म दिया गया है और इसका डिस्प्लेसमेंट लगभग 300 से 400 टन के बीच है। इस डिजाइन की वजह से जहाज को बेहतर स्थिरता, बड़ा डेक एरिया और समुद्र में बेहतर प्रदर्शन मिलता है, जो डाइविंग ऑपरेशन के लिए बेहद जरूरी हैं।
जहाज में कैटामरन-हल फॉर्म एक ऐसा डिजाइन है जिसमें एक ही बड़े ढांचे के बजाय समान आकार के दो समानांतर पतवार होते हैं, जो ऊपर एक साझा डेक या ब्रिजडेक द्वारा आपस में जुड़े होते हैं।
डीएससी ए24 अत्याधुनिक डाइविंग सिस्टम से लैस है और इसे खासतौर पर ऑपरेशनल डाइव्स करने के लिए तैयार किया गया है।
इस जहाज की सबसे बड़ी खासियत है स्वदेशी उपकरण। जहाज में इस्तेमाल होने वाले 70 प्रतिशत मुख्य और सहायक उपकरण स्वदेशी निर्माताओं से लिए गए हैं। इसी कारण डीएससी को आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल का गौरवशाली वाहक कहा जा रहा है।
भारतीय नौसेना में इन जहाजों के शामिल होने से डाइविंग सपोर्ट, अंडरवाटर इंस्पेक्शन, बचाव सहायता और तटीय ऑपरेशनल तैनाती की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे ये जहाज इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और स्वदेशी क्षमता का प्रमाण हैं। ये जहाज न सिर्फ नौसेना की समुद्री ताकत बढ़ाएंगे बल्कि देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
--आईएएनएस
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