समृद्ध उत्तर प्रदेश से ही विकसित भारत का संकल्प होगा साकार: शिवराज सिंह चौहान
लखनऊ, 25 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से किसानों को गुणवत्तायुक्त एवं रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उद्यानिकी क्षेत्र का विस्तार होगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को लखनऊ स्थित योजना भवन के वैचारिकी सभागार में उत्तर प्रदेश के कृषि रोडमैप, कृषि क्षेत्र की विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं तथा ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की संयुक्त समीक्षा की। बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए समृद्ध उत्तर प्रदेश सबसे अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश जितनी तेजी से कृषि, ग्रामीण विकास, और किसानों की समृद्धि के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा, विकसित भारत का लक्ष्य उतनी ही शीघ्रता से साकार होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार आपसी समन्वय तथा साझा प्रयासों से इस राष्ट्रीय संकल्प को अवश्य पूरा करेंगी।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। कृषि, ग्रामीण विकास, आधारभूत संरचना तथा जनकल्याण के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है, लेकिन बदलते समय की चुनौतियों के बीच विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कृषि क्षेत्र में गंभीर मंथन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से यह समीक्षा बैठक आयोजित की गई है, ताकि कृषि को अधिक उत्पादक, लाभकारी, जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ बनाने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चना, मसूर एवं सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने की मंजूरी भी प्रदान की। उन्होंने इस संबंध में स्वीकृति का आशय पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा। मुख्यमंत्री ने इसके लिए केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के अधिकाधिक किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिलेगा और उनके हितों का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित होगा।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के आगामी चरण के लिए पात्र 6,18,482 लाभार्थियों की सूची मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपते हुए प्रदेश सरकार को बधाई दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में गरीब कल्याण की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। पात्रता के आधार पर प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने निर्देश दिए कि योजना के अगले चरण में भी सभी पात्र लाभार्थियों को पूर्ण पारदर्शिता एवं समयबद्ध तरीके से लाभान्वित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लखनऊ आगमन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत नए आवासों की स्वीकृति, चना, मसूर एवं सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने तथा उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाने की स्वीकृति के लिए भी केंद्रीय मंत्री के प्रति आभार प्रकट किया।
बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक ने 'विकसित कृषि 2047 उत्तर प्रदेश कार्ययोजना' पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें जलवायु-समावेशी विकास, कृषि विविधीकरण, संसाधन-आधारित नियोजन, विज्ञान-आधारित कृषि, मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण तथा संपूर्ण शासन तंत्र के समन्वित दृष्टिकोण को विकसित कृषि का आधार बताया गया। बताया गया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश की कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था लगभग 7.41 ट्रिलियन रुपए की है, जिसे वर्ष 2047 तक कृषि विविधीकरण एवं उच्च उत्पादकता-आधारित रणनीति के माध्यम से बढ़ाकर 96.96 ट्रिलियन रुपए तक पहुंचाया जाना चाहिए। इसके लिए वास्तविक कृषि वृद्धि दर को 3.19 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.41 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्ययोजना के अनुसार वर्ष 2047 तक कृषि विकास का आधार केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि उत्पादकता, किसानों की आय, मूल्य संवर्धन तथा निर्यात क्षमता में समग्र वृद्धि होना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक जनपद की कृषि-जलवायु परिस्थितियों एवं बाजार की मांग के अनुरूप कृषि विविधीकरण को व्यापक स्तर पर अपनाया जाना चाहिए। धान एवं गेहूं पर अत्यधिक निर्भरता को कम करते हुए दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, मक्का, बागवानी तथा अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों का विस्तार किया जाना चाहिए। साथ ही उत्पादन से विपणन तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला विकसित कर किसानों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
रोडमैप में स्पष्ट किया गया कि राज्य में उत्पादन वृद्धि का सबसे बड़ा आधार उत्पादकता वृद्धि होगी। धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन, गन्ना, फल एवं सब्जियों में उच्च गुणवत्ता वाले बीज, जलवायु-सहनशील किस्मों, उन्नत कृषि तकनीकों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, सटीक कृषि, आधुनिक यंत्रीकरण तथा डिजिटल कृषि तकनीकों के माध्यम से प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जानी चाहिए। विभिन्न फसलों के वर्तमान उत्पादकता अंतर को कम करना विकसित कृषि की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
--आईएएनएस
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