सलिल चौधरी की डेथ एनिवर्सरी पर जैकी श्रॉफ ने दी श्रद्धांजलि, शेयर की तस्वीर
मुंबई, 5 सितंबर (आईएएनएस)। मशहूर म्यूजिक कंपोजर सलिल चौधरी की डेथ एनिवर्सरी शनिवार को है। इस मौके पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
जैकी श्रॉफ ने इंस्टाग्राम पर सलिल चौधरी की एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वह पियानो बजाते नजर आ रहे हैं। म्यूजिक कंपोजर को टैग कर उन्होंने लिखा, "म्यूजिकल लेजेंड सलिल चौधरी को उनकी डेथ एनिवर्सरी पर याद करते हुए ।"
सलिल चौधरी का निधन 5 सितंबर, 1995 को 69 साल की उम्र में हो गया था।
19 नवंबर, 1925 को बंगाल प्रेसीडेंसी के हरिनावी में जन्मे सलिल चौधरी को सिर्फ एक म्यूजिक कंपोजर से कहीं ज्यादा माना जाता था। वह एक गीतकार, गीतकार, कवि, लेखक और थिएटर पर्सनैलिटी थे। उन्होंने हिंदी, बंगाली और मलयालम समेत 13 भाषाओं में फिल्मों के लिए संगीत बनाया।
वह बांसुरी, पियानो और एसराज जैसे इंस्ट्रूमेंट्स में भी माहिर थे। एक कंपोजर के तौर पर उनकी पहली बंगाली फिल्म 1949 में 'परिवर्तन' थी। हिंदी सिनेमा में उनकी एंट्री 1953 में बिमल रॉय की 'दो बीघा जमीन' से हुई।
1958 में बिमल रॉय की 'मधुमती' के लिए उनका साउंडट्रैक उनके सबसे मशहूर कामों में से एक है। इस फिल्म में 'आजा रे परदेसी', 'सुहाना सफर और यह मौसम हसीन', 'दिल तड़प तड़प के कह रहा है' और 'घड़ी घड़ी मोरा दिल धड़के' जैसे यादगार गाने थे।
इसके बाद उन्होंने कई यादगार गाने गाए, जिनमें परख का 'ओ सजना बरखा बहार आई', छाया का 'इतना ना मुझसे तू प्यार बढ़ा', काबुलीवाला का 'ऐ मेरे प्यारे वतन', आनंद का 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' और 'ज़िंदगी कैसी है पहेली' और छोटी सी बात का 'ना जाने क्यों' शामिल हैं।
इसके बाद उन्होंने लता मंगेशकर, मुकेश, मन्ना डे, किशोर कुमार और आशा भोसले जैसे प्लेबैक सिंगिंग के कुछ सबसे बड़े नामों के साथ काम किया और ऐसी धुनें बनाईं जो आज भी एवरग्रीन मानी जाती हैं।
--आईएएनएस
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