सागर में जहरीली शराब से अब तक 13 लोगों की मौत, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला बोले-दोषी बख्शे नहीं जाएंगे
सागर, 7 सितंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत के बाद हड़कंप मचा हुआ है। नौरोजा और गोगरा गांवों में कई परिवारों ने अपने परिजनों को खो दिया है। इस घटना के बाद मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने नौरोजा और गोगरा गांवों का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मैं पीड़ितों के परिवारों से मिला। वे गहरे दुख और तकलीफ में हैं। उन्होंने मांग की है कि गांवों में अवैध शराब का धंधा चलाने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए और इस शराब के कारोबार के पीछे शामिल सप्लायर्स की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। उनका मानना है कि तभी उन्हें अपने दुख से कुछ राहत मिलेगी। मैंने उन्हें पूरा भरोसा दिलाया है कि प्रशासन सख्त कार्रवाई कर रहा है।"
राजेंद्र शुक्ला ने कहा, "जो जिम्मेदार विभाग के अधिकारी हैं और थाने के लोग हैं, उन सब पर कार्रवाई हो चुकी है। फुटकर व्यापारी जो हैं, जो लोग गांव-गांव में शराब भेजते हैं, उनमें से दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनसे पूछताछ चल रही है और बहुत जल्दी हम तह तक पहुंचेंगे और इसको जड़ से समाप्त करेंगे। एक्साइज विभाग के लोगों को तो सस्पेंड कर दिया गया है, जिला आबकारी अधिकारी और उनके नीचे के जो लोग हैं और थाना प्रभारी को भी यहां से हटा दिया गया है और जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, जिनकी-जिनकी संलिप्तता होगी, किसी को छोड़ा नहीं जाएगा।"
डिप्टी सीएम ने कहा, "कल तक ग्यारह लोगों की मौत हो चुकी थी और अब मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। बाकी 50 से ज्यादा लोग खतरे से बाहर हैं। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। जल्द उनकी छुट्टी होगी। तीन लोगों की हालत गंभीर है, जिनको बचाने का पूरा प्रयास हो रहा है। मुख्यमंत्री ने हर परिवार को चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।"
एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया, "यहां स्थानीय स्तर पर शराब बनाई जाती है। केमिकल बाहर से लाए जाते हैं, लेकिन शराब यहीं बनाई जाती है। उन्होंने शराब में केमिकल की मात्रा बहुत ज्यादा कर दी थी। जरूरी मात्रा लगभग 16-17 प्रतिशत होती है, लेकिन उन्होंने इसे बढ़ाकर लगभग 70 प्रतिशत कर दिया। इसी वजह से शराब पीने के बाद ऐसी घटनाएं हो रही हैं।"
पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि गांव में लंबे समय से दो नंबर की शराब खुलेआम बेची जा रही थी और इसे सरपंच का संरक्षण प्राप्त था। महेंद्र लोदी ने बताया, "यहां दो नंबर की शराब सरपंच के यहां ही आती थी। फिर वहीं से लाकर गांव को लोगों को बेची जाती थी।"
एक महिला ने कहा, "मेरे पति ने शराब पी थी। उनकी मौत हो गई।" दूसरे ने कहा, "मेरा भतीजा गुजर गया। चंदू सिंह कटारवार राजपूत शराब की सप्लाई करता था।"
एक ग्रामीण ने कहा, "पुलिस आई, सब कुछ देखा, लेकिन दो घंटे में ही उन्हें छोड़ दिया गया। जब शराब बिक रही है तो प्रशासन को जानकारी तो होगी ही। अभी 24 घंटे में पता नहीं चला कि एक लड़का कहां है। अस्पताल में 25 लोग भर्ती हैं।"
एक मृतक के भाई ने कहा, "सरकार से हम न्याय चाहते हैं। इनके घर जाकर जांच होनी चाहिए। मेरे भाई के छोटे-छोटे बच्चे हैं, जो अनाथ हो गए। गांव में गली-गली में क्वार्टर बिक रहा है।"
एक बुजुर्ग महिला ने रोते हुए बताया, "शराब पीने के बाद बेटे को उल्टी होने लगी, शरीर फूल गया, अस्पताल ले गए तो डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।"
एक अन्य ग्रामीण ने कहा, "अवैध शराब से 25-30 साल के लड़के मर रहे हैं। प्रशासन ने कई बार आरोपियों को पकड़ा भी, लेकिन पैसा लेकर छोड़ दिया। शिकायत करने पर मारपीट की धमकी दी जाती है।"
--आईएएनएस
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