रोशिबिना देवी: बचपन से ही 'कॉम्बैट स्पोर्ट्स' का शौक, खेल-कूद के साथ पढ़ाई में भी रहीं अव्वल
बिश्नुपुर, 24 सितंबर (आईएएनएस)। एशियन गेम्स 2026 में रोशिबिना देवी ने वुशु में देश को सिल्वर मेडल दिलाया है। उन्होंने यह पदक महिलाओं के 60 किलोग्राम सांडा इवेंट में हासिल किया। यह एशियन गेम्स में उनका तीसरा मेडल है। इससे पहले रोशिबिना ने 17 साल की उम्र में 2018 जकार्ता-पालेमबांग गेम्स में ब्रॉन्ज और हांगझोऊ एशियन गेम्स 2023 में रजत पदक जीता था।
30 दिसंबर 2000 को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के क्वासिफाई मायाई लीकाई गांव में जन्मीं रोशिबिना तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। बचपन से ही उन्हें लड़कों की तरह जोश और फाइटिंग वाले खेलों, जैसे बॉक्सिंग और मार्शल आर्ट्स में काफी रुचि थी। रोशिबिना खेलों के साथ-साथ पढ़ाई में भी बहुत अच्छी थीं और अक्सर अपनी कक्षा में पहला स्थान हासिल करती थीं। माता-पिता चाहते थे कि वह पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दें, क्योंकि उन्हें चिंता थी कि किसान परिवार होने के कारण वे खेलों के लिए जरूरी पोषण, उपकरण और यात्रा का खर्च नहीं उठा सकेंगे।
शुरुआती हिचकिचाहट के बावजूद, रोशिबिना का जुनून कम नहीं हुआ। मुश्किलों का सामना करते हुए, उन्होंने अपनी औपचारिक ट्रेनिंग शुरू करने के लिए अपने पड़ोस की सीनियर और साथी वुशु एथलीट, थोउदाम मालेमंगनबी से मार्गदर्शन लेना शुरू किया।
रोशिबिना ने डॉ. सिफु नोरेंद्रो थोकचोम और कोच मोइरांगथेम रोनाल्ड की देखरेख में आयोजित बिष्णुपुर जिला वुशु चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद, कोच प्रेम और सीनियर खिलाड़ी थोउदाम मालेमंगनबी के मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाई। उन्होंने कश्मीर नेशनल गेम्स में 28 किलोग्राम भार वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू किया और ब्रॉन्ज मेडल जीता। साल 2016 में, उन्होंने 6वीं वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में इंटरनेशनल लेवल पर डेब्यू किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके आगे बढ़ने की शुरुआत हुई।
एशियन गेम्स में बेटी की उपलब्धि पर रोशिबिना देवी के पिता नाओरेम धामू भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, "वह गोल्ड जीतने की जबरदस्त इच्छा के साथ इन एशियन गेम्स में गई थीं। हमें पता है कि गोल्ड का सपना पूरा न हो पाने से उन्हें थोड़ा दुख हुआ होगा, लेकिन माता-पिता के तौर पर हमें गर्व है। अपनी मातृभूमि, मणिपुर के लिए इंटरनेशनल मेडल जीतना एक बेमिसाल उपलब्धि है।"
पिता ने बताया कि अगर कभी ओलंपिक गेम्स में वुशु सांडा को शामिल किया जाता है, तो ओलंपिक गोल्ड जीतने की कोशिश में रोशिबिना को उनका पूरा और बिना शर्त समर्थन मिलेगा।
अपनी बेटी की सफलता के बारे में बात करते हुए, पिता ने इसका श्रेय उनके कोच, स्थानीय विधायक और विलेज क्लबों को दिया, खासकर क्वाशिफाई यूथ वॉलंटरी ऑर्गनाइजेशन और क्वाशिफाई न्यू यूथ क्लब को, जिन्होंने मुश्किल समय में जरूरी आर्थिक और नैतिक सपोर्ट दिया। उन्होंने कहा, "हम हमेशा उनके आभारी रहेंगे; यह ऐसा कर्ज है जिसे हम इस जिंदगी में कभी नहीं चुका सकते।"
नाओरेम रोशिबिना की मां नाओरेम रोमिला ने कहा, "मुझे बहुत खुशी है कि मेरी बेटी ने एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता है। हालांकि उसका लक्ष्य गोल्ड जीतना था, लेकिन सिल्वर मेडल भी हमारे लिए उतनी ही खुशी की बात है। हमारे परिवार के लिए यह बहुत गर्व का पल है, क्योंकि उन्होंने हमारे राज्य का नाम रोशन किया है।"
--आईएएनएस
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