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आरएन रवि अब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, चेन्नई के लोक भवन में सीएम स्टालिन ने की मुलाकात

चेन्नई, 7 मार्च (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेन्नई स्थित लोक भवन में राज्यपाल आरएन रवि से मुलाकात कर उन्हें पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किए जाने पर बधाई दी। इस मौके पर स्टालिन ने सम्मान के तौर पर उन्हें शॉल ओढ़ाया और संत तिरुवल्लुवर की प्रतिमा भेंट की।
 
आरएन रवि अब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, चेन्नई के लोक भवन में सीएम स्टालिन ने की मुलाकात

चेन्नई, 7 मार्च (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेन्नई स्थित लोक भवन में राज्यपाल आरएन रवि से मुलाकात कर उन्हें पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किए जाने पर बधाई दी। इस मौके पर स्टालिन ने सम्मान के तौर पर उन्हें शॉल ओढ़ाया और संत तिरुवल्लुवर की प्रतिमा भेंट की।

दरअसल, आरएन रवि का तमिलनाडु से पश्चिम बंगाल स्थानांतरण कर दिया गया है। उन्होंने 18 सितंबर 2021 को तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। उनके चार साल के कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार और राजभवन के बीच कई बार टकराव की स्थिति भी देखने को मिली।

वर्ष 2021 में पद संभालने के बाद से डीएमके सरकार और राज्यपाल के बीच कई मुद्दों पर मतभेद रहे। ये टकराव संवैधानिक, कानूनी और राजनीतिक स्तर पर भी देखने को मिले, जिससे यह संबंध अक्सर चर्चा में बना रहा।

आरएन रवि 1976 बैच के आईपीएस अधिकारी (केरल कैडर) रहे हैं। अपने लंबे करियर में उन्होंने इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और सीबीआई में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

राज्यपाल बनने से पहले आरएन रवि नागा शांति वार्ता के लिए भारत सरकार के प्रमुख वार्ताकार (इंटरलॉक्यूटर) भी रहे थे। इसके अलावा वे 2019 से 2021 तक नागालैंड के राज्यपाल भी रह चुके हैं और इस दौरान उन्हें मेघालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था।

बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार हर राज्य के लिए एक राज्यपाल होता है। राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुहर लगे आदेश से राज्यपाल की नियुक्ति करते हैं।

हालांकि, इस प्रक्रिया में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आमतौर पर, राष्ट्रपति उसी व्यक्ति को राज्यपाल नियुक्त करते हैं, जिसके नाम की सिफारिश प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद करती है।

सामान्य रूप से राज्यपाल का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। हालांकि संविधान के अनुच्छेद 156 के अनुसार राष्ट्रपति चाहें तो राज्यपाल को किसी भी समय पद से हटा सकते हैं।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस