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आरआईडीएफ परियोजनाओं की समीक्षा, जरूरत पड़ी तो बढ़ाई जाएगी बॉरोइंग पावर: मुख्य सचिव

लखनऊ, 16 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण अवसंरचना विकास को गति देने के उद्देश्य से नाबार्ड के ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) से वित्त पोषित परियोजनाओं की समीक्षा के लिए सोमवार को हाई पावर कमेटी की पांचवीं बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 में चल रही परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया।
 
आरआईडीएफ परियोजनाओं की समीक्षा, जरूरत पड़ी तो बढ़ाई जाएगी बॉरोइंग पावर: मुख्य सचिव

लखनऊ, 16 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण अवसंरचना विकास को गति देने के उद्देश्य से नाबार्ड के ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) से वित्त पोषित परियोजनाओं की समीक्षा के लिए सोमवार को हाई पावर कमेटी की पांचवीं बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 में चल रही परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया।

मुख्य सचिव ने चौथी समीक्षा बैठक के बाद परियोजनाओं में हुई प्रगति को संतोषजनक बताते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर चालू वित्तीय वर्ष के लिए राज्य की बोर्रोइंग पावर बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने नाबार्ड और कार्यदायी विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि परियोजना स्वीकृति, प्रतिपूर्ति दावे और परियोजना पूर्णता प्रमाणपत्र (पीसीआर) समयबद्ध तरीके से नाबार्ड को भेजे जाएं, ताकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की देरी न हो। बैठक में पशुपालन विभाग द्वारा आरआईडीएफ के अंतर्गत प्रस्तावित पशु चिकित्सालय परियोजना के मॉडल प्रस्ताव की भी समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि इस प्रस्ताव को शीघ्र तैयार कर नाबार्ड को स्वीकृति के लिए भेजा जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सुविधाओं को और सुदृढ़ किया जा सके। इसके अलावा ‘प्रोजेक्ट येट टू बी ग्राउंडेड’ (पीवाईजी) और ‘स्लो मूविंग प्रोजेक्ट्स’ (एसएमपी) की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि इन परियोजनाओं का विस्तृत विवरण नाबार्ड को उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनकी प्रगति की नियमित निगरानी की जा सके। उन्होंने सभी विभागों और नाबार्ड को आपसी तालमेल बढ़ाकर विभिन्न कार्यबिंदुओं पर संयुक्त रूप से कार्य करने की भी सलाह दी। बैठक से पहले नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज कुमार ने जानकारी दी कि चालू वित्तीय वर्ष में आरआईडीएफ-XXXI के तहत विभिन्न विभागों की कुल 2419 करोड़ रुपए की नई परियोजनाएं अब तक स्वीकृत की जा चुकी हैं।

वहीं, 2700 करोड़ रुपए के वितरण लक्ष्य के मुकाबले विभिन्न कार्यदायी विभागों को अब तक 2713 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार को चालू वित्तीय वर्ष के लिए 31 मार्च 2026 तक 3100 करोड़ रुपए तक की धनराशि वितरित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस धनराशि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया जाएगा, जिससे कृषि, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

--आईएएनएस

विकेटी/डीकेपी