रेजीनगर उपचुनाव में वोटों के आंकड़ों पर अभिषेक बनर्जी के दावे को चुनाव आयोग ने नकारा
कोलकाता, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों को लेकर तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के दावे को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि रेजीनगर के एक मतदान केंद्र पर भाजपा के विजयी उम्मीदवार सखाराव सरकार को वहां पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या से अधिक वोट मिले। हालांकि, मुर्शिदाबाद के जिला निर्वाचन अधिकारी ने मतदाताओं और पड़े वोटों के आंकड़े साझा करते हुए इस दावे को गलत बताया।
अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर दावा किया कि रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 109 में भाजपा उम्मीदवार को 909 वोट मिले, जबकि वहां पंजीकृत मतदाताओं की संख्या केवल 772 थी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि किसी एक पार्टी को मतदान केंद्र पर कुल मतदाताओं से अधिक वोट कैसे मिल सकते हैं।
उन्होंने अपने पोस्ट में तंज कसते हुए कहा कि उत्तर कोरिया के लिए भी इस चुनावी गणित को समझाना मुश्किल होगा। इसके कुछ घंटे बाद मुर्शिदाबाद के जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी ने सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण जारी किया। अधिकारी के अनुसार, रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के मतदान केंद्र संख्या 109 की मतदाता सूची में कुल 1,109 पंजीकृत मतदाता थे। इस केंद्र पर सभी उम्मीदवारों को मिलाकर कुल 972 वोट पड़े थे। जिला निर्वाचन अधिकारी के इस स्पष्टीकरण के बाद पंजीकृत मतदाताओं की संख्या से अधिक वोट मिलने के अभिषेक बनर्जी के दावे पर सवाल खड़े हो गए।
इस बीच, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए एक अन्य दावे को भी खारिज किया है।
'डीकोडर' नाम के सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किए गए एक वीडियो में दावा किया गया था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने का इस साल हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों पर असर पड़ा। पोस्ट में यह सवाल भी उठाया गया था कि क्या बंगाल के चुनावी विश्लेषण से आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कोई सबक मिलता है।
इस पर सीईओ कार्यालय ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत निर्धारित प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों के साथ की गई। इसका उद्देश्य वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।
सीईओ कार्यालय के अनुसार, किसी भी मतदाता का नाम निर्धारित प्रक्रिया के बिना नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए नोटिस जारी करना, सुनवाई का अवसर देना और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) की ओर से कारणों सहित आदेश पारित करना आवश्यक है। कार्यालय ने यह भी कहा कि संबंधित फैसलों के खिलाफ दो स्तरों पर अपील की व्यवस्था उपलब्ध है।
सीईओ कार्यालय ने कहा कि पश्चिम बंगाल के चुनावी आंकड़े एसआईआर के कारण किसी खास राजनीतिक दल को नुकसान पहुंचने के दावे का समर्थन नहीं करते।
--आईएएनएस
डीएससी
