राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए समाज के सभी वर्गों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता: राजनाथ सिंह
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक कार्यक्रम में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, जो भारत के विकसित भारत के सफर का एक अनिवार्य स्तंभ है, प्रत्येक नागरिक का सामूहिक कर्तव्य है, न कि केवल रक्षा बलों की जिम्मेदारी। उन्होंने कहा कि हालांकि सैनिक रक्षा की पहली पंक्ति हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूती जनता में एकता, अनुशासन और जागरूकता से भी उतनी ही निर्धारित होती है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि बदलती चुनौतियों और मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के सामने कोई भी व्यक्ति निष्क्रिय नहीं रह सकता। उन्होंने लोगों से जिम्मेदारी से और गहरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने आगे कहा, “राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए समाज के सभी वर्गों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। नागरिकों को कानून का पालन करके, गलत सूचनाओं को नकार कर और व्यक्तिगत लाभ से ऊपर राष्ट्र के हितों को रखकर राष्ट्रीय सुरक्षा में सार्थक योगदान देना चाहिए। एक राष्ट्र के रूप में, हम विभिन्न शत्रुतापूर्ण तत्वों से घिरे हुए हैं। हमें अपने पास मौजूद हर संसाधन का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना होगा।”
राजनाथ सिंह ने आज के तेजी से बदलते परिवेश में सूचना को एक शक्तिशाली उपकरण बताते हुए कहा कि गलत सूचना और अफवाहें समाज में अस्थिरता पैदा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि जनता तक सटीक और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने आगे कहा, “मीडिया केवल समाचार प्रसारित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक शक्तिशाली संस्था है जो जनमत को आकार देती है। इसे यह समझना चाहिए कि यदि राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील मुद्दों को सनसनीखेज खबरों के लिए गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। राष्ट्र निर्माण में एक महत्वपूर्ण भागीदार होने के नाते, मीडिया की यह जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसके द्वारा प्रस्तुत सामग्री राष्ट्रीय हित में हो और अनावश्यक भय या भ्रम को बढ़ावा न दे।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई समझौता नहीं करती है और विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप कल्याणकारी उपायों के साथ-साथ रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रक्षा बलों को भारतीय धरती पर निर्मित अत्याधुनिक हथियारों और उपकरणों से लैस किया जाए।
सरकार द्वारा किए जा रहे आत्मनिर्भरता प्रयासों की सफलता पर प्रकाश डालते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में वार्षिक रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात 2025-26 में सर्वकालिक उच्च स्तर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की आश्चर्यजनक वृद्धि है।
उन्होंने 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात के लक्ष्य को प्राप्त करने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, “हमारे प्रयास आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की नींव रख रहे हैं। जिस गति से हम आगे बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए भारत जल्द ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएगा और विश्व के अग्रणी देशों में शुमार होगा।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि विकसित भारत का अर्थ केवल भौतिक अवसंरचना ही नहीं है, बल्कि यह पारस्परिक उत्तरदायित्व पर आधारित एक ऐसे समाज का निर्माण भी है, जहां कोई भी पीछे न छूटे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सैनिकों द्वारा सबसे प्रतिकूल युद्धक्षेत्र परिस्थितियों में भी प्रदर्शित की जाने वाली एकजुटता और टीमवर्क की भावना को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यही भावना विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्र के आगे के सफर का मार्गदर्शन करनी चाहिए।
इस कार्यक्रम के तहत राजनाथ सिंह ने वीरता पुरस्कार से सम्मानित युद्ध नायकों को सम्मानित किया, जिनमें सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) योगेंद्र सिंह यादव; सूबेदार और मानद कप्तान करम सिंह के परिजनों, कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार अब्दुल हामिद, सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल, कप्तान विक्रम बत्रा, कप्तान मनोज कुमार पांडे और ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान; और शहीद हुए नायकों की वीर नारियों को राष्ट्र की सेवा में उनके साहस और बलिदान के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
रक्षा मंत्री ने मेजर सोमनाथ शर्मा, नायक जदुनाथ सिंह, कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार अब्दुल हामिद, कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन मनोज कुमार पांडे जैसे वीर योद्धाओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि उनकी वीरता की गाथाएं लोगों, विशेषकर युवाओं को प्रेरित करती रहेंगी और उनमें साहस, देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों के साथ-साथ बलिदान की भावना को भी विकसित करती रहेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वीरता पुरस्कार विजेताओं की कहानियां युवाओं के जीवन पथ को दिशा देने में मार्गदर्शक का काम करेंगी।
राजनाथ सिंह ने वीर सैनिकों के परिवारों को मातृभूमि की सेवा करने वालों का मनोबल ऊंचा रखने वाला अदृश्य शक्ति स्तंभ बताया और भारत की संप्रभुता की रक्षा और सैनिकों के सम्मान को बनाए रखने के सरकार के संकल्प को दोहराया।
उन्होंने जनता से राष्ट्रीय सुरक्षा में इन परिवारों के अमूल्य योगदान का सम्मान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “जब भी मैं शहीद सैनिकों के परिवारों से मिलता हूं, तो मुझे उनका दुख तो महसूस होता है, लेकिन उनके भीतर गहरा गर्व भी होता है, जो किसी भी शिकायत से मुक्त होता है। ऐसा लचीलापन उस संस्कृति से उत्पन्न होता है जहां बलिदान को सर्वोच्च मूल्य माना जाता है।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्या सेंगपुटा सहित कई गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।
--आईएएनएस
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