राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों का हित सर्वोपरि, दिल्ली हाईकोर्ट ने दी कानून की सही व्याख्या : डॉ. पवन दुग्गल
नई दिल्ली, 19 जून (आईएएनएस)। टेलीग्राम ऐप पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद साइबर कानून विशेषज्ञ डॉ. पवन दुग्गल ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने कानून की सही व्याख्या करते हुए राष्ट्रीय हित और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।
साइबर लॉ एक्सपर्ट डॉ. पवन दुग्गल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट और ठोस कानूनी आधार प्रस्तुत किए हैं। उनके अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए केंद्र सरकार को यह अधिकार देती है कि वह ऐसी किसी भी ऑनलाइन सामग्री या प्लेटफॉर्म को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर सकती है जो देश की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है अथवा नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन करता हो।
उन्होंने कहा कि अदालत ने पाया कि इस मामले में धारा 69ए के तहत सरकार द्वारा प्राप्त शक्तियों का उचित और वैध उपयोग किया गया है। साथ ही, परिस्थितियां आपातकालीन प्रकृति की थीं, क्योंकि टेलीग्राम प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पहले परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने, उन्हें बेचने और अवैध रूप से प्रसारित करने के लिए किया जा चुका था। सरकार नहीं चाहती कि ऐसी घटनाएं दोबारा सामने आएं।
डॉ. दुग्गल ने यह भी स्पष्ट किया कि टेलीग्राम पर लगाया गया प्रतिबंध स्थायी नहीं है और यह केवल 22 जून तक लागू रहेगा। यह सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवा प्रदाताओं के लिए स्पष्ट संदेश है कि भारत में संचालन करने के लिए भारतीय कानूनों का पालन करना अनिवार्य है। यदि जांच एजेंसियां किसी मामले में जानकारी मांगती हैं, तो संबंधित प्लेटफॉर्म को सहयोग करना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि टेलीग्राम के पास अभी कानूनी विकल्प खुले हुए हैं। कंपनी चाहे तो हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील कर सकती है और सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती है। अदालत ने अपने फैसले में यह सिद्धांत स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों के हित सर्वोपरि हैं।
डॉ. दुग्गल ने कहा कि प्लेटफॉर्म में कई प्रकार के बदलाव संभव हैं, जिनकी जानकारी आम उपयोगकर्ताओं को नहीं हो पाती। भारतीय उपयोगकर्ता अक्सर ऑनलाइन दिखाई देने वाली जानकारी पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं। ऐसे में यदि किसी संदेश, दस्तावेज या तारीख में बदलाव किया जाए तो लोग भ्रमित हो सकते हैं और साइबर धोखाधड़ी का शिकार बन सकते हैं।
--आईएएनएस
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