राष्ट्रीय महिला आयोग ने धर्मशाला में छात्रा की मौत पर स्वतः संज्ञान लिया, पुलिस को दी सख्त कार्रवाई की हिदायत
नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित राजकीय डिग्री कॉलेज में रैगिंग, शारीरिक और यौन उत्पीड़न की एक गंभीर घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है।
इस मामले में 19 वर्षीय छात्रा की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। आयोग ने इस घटना को जघन्य और अमानवीय करार देते हुए कड़ी निंदा की है।
आयोग की अध्यक्ष ने हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर तुरंत एफआईआर दर्ज करने, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने और निष्पक्ष व समयबद्ध जांच के निर्देश दिए हैं।
साथ ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मेडिकल रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने की हिदायत दी गई है। भारतीय न्याय संहिता 2023, यौन उत्पीड़न रोकथाम कानूनों और रैगिंग विरोधी नियमों के तहत सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है।
इसके अलावा आयोग ने लापरवाह या दोषी शिक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच, कॉलेज में एंटी-रैगिंग व्यवस्था की समीक्षा और परिसर की सुरक्षा, जागरूकता कार्यक्रमों तथा काउंसलिंग सुविधाओं को मजबूत बनाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
पुलिस से पांच दिनों के अंदर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) आयोग को भेजने को कहा गया है। वहीं, एनसीडब्ल्यू ने महिलाओं से ऐसी किसी भी घटना की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 14490 पर संपर्क करने की अपील की है।
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। सरकारी कॉलेज में कथित रैगिंग और यौन उत्पीड़न से मानसिक रूप से परेशान 19 वर्षीय छात्रा की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा, प्रशासनिक संवेदनशीलता और पुलिस की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
छात्रा के पिता विक्रम कुमार के बयान के आधार पर पुलिस ने तीन छात्राओं और एक कॉलेज प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
विक्रम कुमार ने कॉलेज प्रशासन, पुलिस और समाज की सोच पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कॉलेज में छात्रा के साथ न केवल सीनियर छात्राओं ने दुर्व्यवहार किया, बल्कि एक प्रोफेसर ने भी उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्होंने जातिसूचक शब्द कहे जाने और लगातार टॉर्चर का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी बेटी इस मानसिक यातना को सह नहीं सकी। अगर शुरुआती दौर में पुलिस और कॉलेज प्रशासन ने गंभीरता दिखाई होती, तो शायद उनकी बेटी जिंदा होती।
--आईएएनएस
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