राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी प्रयोगशाला है 'अभाविप', प्रो. केलकर का चिंतन आज भी प्रासंगिक: स्वांत रंजन
लखनऊ, 21 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने मंगलवार को कहा कि प्रो. यशवंतराव केलकर ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) को केवल एक छात्र संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और नेतृत्व तैयार करने का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि सामूहिकता, पारदर्शिता, स्वायत्तता और रचनात्मक कार्यशैली पर आधारित प्रो. केलकर का संगठनात्मक चिंतन आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना परिषद की स्थापना के दौर में था।
गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अभाविप के संगठन शिल्पी प्रो. यशवंतराव केलकर की जन्मशती वर्ष के अवसर पर आयोजित विशेष अभिवाचन कार्यक्रम 'प्रिय केलकर जी' को संबोधित करते हुए स्वांत रंजन ने कहा कि प्रो. केलकर ने विद्यार्थी परिषद को केवल छात्र हितों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे ऐसे संगठन के रूप में विकसित किया, जो समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित नेतृत्व तैयार करता है।
उन्होंने कहा कि आज जब समाज और छात्र जीवन नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब केलकर के विचार कार्यकर्ताओं को दिशा देने का काम कर रहे हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचार सह-प्रमुख मनोज कांत ने कहा कि प्रो. केलकर का उद्देश्य ऐसे व्यक्तित्वों का निर्माण करना था, जो जीवन के किसी भी क्षेत्र में रहकर अपने विचार और आचरण से भारत का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने कहा कि इसी सोच का परिणाम है कि आज अभाविप विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन बन चुका है और शिक्षा, प्रशासन, न्यायपालिका, विज्ञान, उद्योग, नवाचार, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक जीवन सहित अनेक क्षेत्रों में राष्ट्रनिष्ठ नेतृत्व दे रहा है।
विशिष्ट अतिथि एवं उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि वे पहले भी अभाविप के कार्यकर्ता थे और आज भी स्वयं को उसी परिवार का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जो भी पहचान मिली है, उसकी बुनियाद विद्यार्थी परिषद ने रखी। संगठन ने उन्हें राष्ट्र प्रथम का भाव, सामाजिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व के संस्कार दिए।
दयाशंकर सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने के वैचारिक संघर्ष में अभाविप की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्षों तक संगठन ने राष्ट्रहित में जनजागरण और वैचारिक वातावरण तैयार किया, जिसके परिणामस्वरूप देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक निर्णय संभव हो सका।
उन्होंने युवाओं से राष्ट्रवादी विचारों और सेवा की भावना को अपने जीवन में अपनाकर विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में प्रो. यशवंतराव केलकर के व्यक्तित्व, कृतित्व, संगठन निर्माण में उनके योगदान और वर्तमान समय में उनके विचारों की प्रासंगिकता पर विशेष अभिवाचन और विचार-विमर्श किया गया।
इससे पूर्व अभाविप के पूर्व एवं वर्तमान कार्यकर्ताओं का मिलन-समागम भी आयोजित हुआ, जिसमें वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने प्रो. केलकर से जुड़े संस्मरण साझा किए। अभाविप अवध प्रांत के प्रांत मंत्री अर्पण कुशवाहा ने कहा कि जन्मशती वर्ष का यह आयोजन संगठन की विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद और अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण अवसर बना है।
वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के अनुभव वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं और इससे संगठन के प्रति समर्पण की भावना और मजबूत होगी।
--आईएएनएस
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