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रंजीत रंजन ने सरकार पर लगाया चर्चा से भागने का आरोप, अमरा राम ने भी साधा निशाना

नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को भी सदन के भीतर और बाहर विपक्ष का हंगामा जारी रहा। लगातार हो रहे विरोध के कारण संसद की कार्यवाही बाधित हुई और दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। संसद परिसर में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस बीच कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन और सीपीआई(एम) सांसद अमरा राम ने मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए।
 

नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को भी सदन के भीतर और बाहर विपक्ष का हंगामा जारी रहा। लगातार हो रहे विरोध के कारण संसद की कार्यवाही बाधित हुई और दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। संसद परिसर में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस बीच कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन और सीपीआई(एम) सांसद अमरा राम ने मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए।

कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया जबकि सरकार संसद के भीतर इस मामले में सही जानकारी नहीं दे रही है। मंत्री संसद में झूठ बोल रहे हैं जबकि डीसीपी ने माना है कि दो राउंड फायरिंग हुई थी। इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय की बनती है क्योंकि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है।

रंजीत रंजन ने सवाल उठाया कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो वह सदन में खुलकर चर्चा से क्यों बच रही है। विपक्ष लगातार जवाब मांग रहा है लेकिन सरकार चर्चा करने के बजाय शोर-शराबे और कार्यवाही बाधित होने का हवाला देकर बचने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून पारित किया लेकिन इसके तुरंत बाद ओडिशा में पेपर लीक की खबर सामने आ गई। रंजीत रंजन ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान राम के नाम पर मिले चढ़ावे में चोरी हुई है और सरकार इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है। पूरी दुनिया से कहा जा रहा है कि कोई चोरी नहीं हुई है।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए कहा, "आप 56 इंच का सीना दिखाते थे। आपके साथ आपके राइट हैंड केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह थे। आज दोनों अपना मुंह क्यों छिपा रहे हैं? सदन के भीतर आइए, बताइए चंदा किसने चोरी किया? इतना शोर मचाने से आपकी साख कम हो रही है। कभी बोलना पड़ेगा। सदन के भीतर आइए और जवाब दीजिए।"

उन्होंने कहा, "पूरे देश महंगाई, बेरोजगारी, ईंधर और शिक्षा व्यवस्था से परेशान है और आप मुंह छिपाते फिर रहे हैं। सदन के भीतर भी नहीं आ रहे हैं। क्या इस तरह से सत्ता चलती है? या आपका मेन टारगेट सिर्फ चुनाव जीतना है? अब तो आप चुनाव क्या जीतेंगे। अभी तो धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है। मुझे लगता है इस डर से नहीं आ रहे हैं कि जिस दिन वे सदन पहुंचेंगे, दूसरे दिन गृह मंत्री को भी इस्तीफा देना पड़ेगा।"

वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद अमरा राम ने भी छात्रों के प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल आदेशों का पालन करती है, इसलिए इस पूरे मामले की सबसे बड़ी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। अमरा राम ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों की बात सुनना चाहती, तो 25 जुलाई को बातचीत करने के बजाय 18 या 19 जुलाई को ही संवाद शुरू कर सकती थी। शुरुआत में छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया। पहले उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई, फिर आंदोलन को दबाने का प्रयास हुआ और बाद में बल प्रयोग किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लाठीचार्ज और पैलेट गन जैसी कार्रवाई की गई, जो टाली जा सकती थी। यदि सरकार समय रहते बातचीत का रास्ता अपनाती तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। उन्होंने कहा कि आखिरकार सरकार को बातचीत करनी ही पड़ी, लेकिन तब तक हालात काफी तनावपूर्ण हो चुके थे।

-- आईएएनएस

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