रांची की सिविल कोर्ट का अहम फैसला, मादक पदार्थ तस्करी मामले में दो दोषियों को 18-18 वर्ष की सश्रम कैद
रांची, 25 जून (आईएएनएस)। रांची में वर्ष 2023 में पकड़ी गई 1184 किलोग्राम गांजा की खेप से जुड़े चर्चित मामले में अदालत ने दो दोषियों को 18-18 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। रांची सिविल कोर्ट के अपर न्यायायुक्त ओंकार नाथ चौधरी की अदालत ने गुरुवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
सजा पाने वालों में गणेश चौधरी और आनंद कुमार शामिल हैं। दोनों फिलहाल बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार में बंद हैं। उन्हें सजा सुनाए जाने के लिए अदालत में पेश किया गया था।
अदालत ने दोनों दोषियों को एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया। व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ रखने, तस्करी के लिए वाहन का उपयोग करने तथा आपराधिक साजिश रचने के आरोप में उन्हें अलग-अलग 18-18 वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक धारा में एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तीनों सजाएं एक साथ चलेंगी। ऐसे में दोनों दोषियों को कुल 18 वर्ष कारावास की सजा भुगतनी होगी। हालांकि यदि वे निर्धारित जुर्माना राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त कारावास भी भुगतना पड़ सकता है।
मामला वर्ष 2023 का है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक ट्रक के जरिए बड़ी मात्रा में गांजा की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में संदिग्ध ट्रक को रोका गया। तलाशी के दौरान ट्रक से 1184 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ था। बरामद मादक पदार्थ की अनुमानित बाजार कीमत करीब 2.36 करोड़ रुपये आंकी गई थी। पुलिस ने मौके से ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद से दोनों जेल में बंद थे।
मामले में 16 अप्रैल 2024 को आरोप तय किए गए थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और वैज्ञानिक प्रमाण अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। विशेष लोक अभियोजक की ओर से पेश साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पहले दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और बाद में सजा सुनाई। हाल के वर्षों में राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में यह सबसे कठोर सजाओं में से एक है।
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