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राम मंदिर चढ़ावा मामला: इमरान मसूद बोले- निष्पक्ष जांच हो, सभी पक्षों के बयान हों दर्ज

नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की ओर से विपक्षी नेताओं के बयान दर्ज कराने की मांग पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन लोगों ने सबसे पहले आरोप लगाए और सबूत पेश किए, उन्हें भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।
 

नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की ओर से विपक्षी नेताओं के बयान दर्ज कराने की मांग पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन लोगों ने सबसे पहले आरोप लगाए और सबूत पेश किए, उन्हें भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।

दरअसल, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या के डीएसपी को पत्र लिखकर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल समेत विपक्षी नेताओं के बयान दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं के बयानों की भी जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

इस पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में रिपोर्ट किसने दर्ज कराई? एसआईटी का गठन किसने किया? यह मुद्दा सबसे पहले किसने उठाया? संजय सिंह ने सबूत दिए थे। उन्हें भी जांच में शामिल किया जाए, सब कुछ साफ हो जाएगा।"

उन्होंने कहा कि यदि एफआईआर दर्ज हुई है और उसके साथ कुछ तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं तो यह भी जांच का विषय है कि वे तथ्य सही हैं या गलत। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "यह वही बात हो गई कि चोरी भी हुई और ऊपर से सीनाजोरी भी। एक तरफ राम के नाम पर लोगों की आस्था से जुड़कर काम किए गए और दूसरी तरफ उन्हीं के नाम पर चोरी और डकैती के आरोप सामने आए। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठेंगे और वे सवाल जरूर पूछेंगे।"

6 जुलाई को प्रस्तावित राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक पर पूछे गए सवाल के जवाब में इमरान मसूद ने कहा कि उन्हें बैठक के एजेंडे की जानकारी नहीं है, लेकिन जो भी घटनाक्रम सामने आया है, उसकी सच्चाई कानून के माध्यम से सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा, "यह मेरा विषय नहीं है कि ट्रस्ट की बैठक में क्या होगा, लेकिन जो कुछ भी हुआ है। वह कानून के सामने आना चाहिए और सभी मामलों का खुलासा होना चाहिए।"

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मसूद ने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद देश जवाब चाहता है। उन्होंने कहा, "लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है। देश जवाब मांगेगा और लोग सवाल पूछेंगे। ऐसा नहीं हो सकता कि ऐसी घटनाएं होती रहें और लोगों को सवाल पूछने का अधिकार भी न मिले।"

इमरान मसूद ने इथेनॉल ब्लेंडिंग की नीति पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण लोगों के वाहनों पर असर पड़ रहा है और इस संबंध में सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा, "पहले पेट्रोल में मिलावट होती थी तो विरोध होता था, लेकिन अब सरकार खुद कह रही है कि इथेनॉल मिलाया जा रहा है।"

उन्होंने पेट्रोल-डीजल की कीमतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्ष 2014 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अधिक होने के बावजूद ईंधन की कीमतों का स्वरूप अलग था, जबकि बाद के वर्षों में कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद आम लोगों को महंगा पेट्रोल-डीजल खरीदना पड़ा। उन्होंने सरकार से इस संबंध में जवाब देने की मांग की।

कोलकाता में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा में तोड़फोड़ की घटना पर भी इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में नफरत की राजनीति नहीं, बल्कि कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।

--आईएएनएस

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