राम मंदिर चंदा विवाद पर सियासत, ट्रस्ट के बचाव से लेकर ट्रस्ट भंग करने तक की उठी मांग
नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। राम मंदिर चंदा विवाद पर सियासत जारी है। एक तरफ जहां राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार कर रहे हैं। दूसरी तरफ विपक्षी दल और कुछ संगठन ट्रस्ट को भंग करने और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच भाजपा नेताओं और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की वकालत करते हुए विपक्ष पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है।
अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेन्द्र दास ने कहा कि ट्रस्ट लगातार आय-व्यय का हिसाब-किताब सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करता रहा है और हर तीन महीने में लेखा-जोखा की समीक्षा की जाती है। यदि कहीं कोई कमी या अनियमितता मिलेगी तो उसे सार्वजनिक रूप से बताया जाएगा, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है। रामलला की नियमित पूजा-अर्चना, धूप-दीप, नैवेद्य और आरती विधिवत जारी है और अधिकांश श्रद्धालु इससे संतुष्ट हैं। केवल वही लोग असंतुष्ट हैं, जो राम के नाम पर राजनीति या आर्थिक लाभ लेना चाहते हैं। उन्होंने इस्तीफे की खबरों को 100 प्रतिशत झूठा करार दिया।
अहमदाबाद में भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने कहा कि भगवान राम के नाम पर दिए गए दान का दुरुपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। जैसे ही ट्रस्ट को कथित चोरी की जानकारी मिली, जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया और उसने तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसके आधार पर कार्रवाई शुरू की गई। यदि किसी ने एक रुपया भी गलत तरीके से लिया है तो उससे वह राशि वापस ली जाएगी और उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी। जो लोग कभी राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा नहीं रहे और जिन्होंने मंदिर के अस्तित्व तक पर सवाल उठाए थे, वही अब दान के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। इस मामले को लेकर सरकार पूरी तरह संवेदनशील है और राम भक्तों की आस्था से जुड़े एक-एक पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
जम्मू में शिवसेना (यूबीटी) कार्यकर्ताओं ने राम मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ प्रदर्शन किया और ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की मांग उठाई। इस दौरान जम्मू-कश्मीर शिवसेना (यूबीटी) के प्रदेश अध्यक्ष मनीष साहनी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थलों पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि पहले राम मंदिर भूमि खरीद मामले को लेकर विवाद हुआ और अब चढ़ावे की कथित चोरी के आरोप सामने आ रहे हैं। इसके अलावा वैष्णो देवी और तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए उन्होंने धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी हिंदू मंदिरों और धार्मिक संस्थानों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए तथा चारों शंकराचार्यों के नेतृत्व में एक हिंदू संरक्षण बोर्ड का गठन किया जाए। मंदिरों की आय का उपयोग हिंदू संस्कृति, धार्मिक शिक्षा और जनकल्याण कार्यों पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि राम मंदिर मामले की जांच कर रही एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि लोगों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि अब राम मंदिर ट्रस्ट पर लोगों का विश्वास कमजोर हुआ है और केवल इस्तीफों से काम नहीं चलेगा, बल्कि व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
लखनऊ में जितेंद्र नारायण सिंह (वसीम रिजवी) ने राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि उनका इस्तीफा जल्दबाजी में लिया गया फैसला प्रतीत होता है। वह चंपत राय को वर्ष 2009 से जानते हैं और राम मंदिर आंदोलन में उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। विपक्ष लगातार राम मंदिर को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। बड़े संगठनों में कभी-कभी कुछ लोग भरोसे का गलत फायदा उठा लेते हैं, लेकिन इससे पूरे संगठन या आंदोलन पर सवाल खड़े नहीं किए जा सकते।
उन्होंने विपक्षी नेताओं से सवाल किया कि वे पहले यह बताएं कि राम मंदिर निर्माण और आंदोलन में उनका क्या योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने के बजाय तथ्य सामने आने का इंतजार किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि कुछ विपक्षी नेता मामले को जानबूझकर राजनीतिक रंग दे रहे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जो लोग आज राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं और सरकार का विरोध कर रहे हैं, उन्हें सबसे पहले यह रसीद दिखानी चाहिए कि उन्होंने खुद राम मंदिर के निर्माण में कितना योगदान दिया है। बिना किसी योगदान के केवल राजनीतिक फायदे के लिए मंदिर और संबंधित मुद्दों पर सवाल खड़े करना दुर्भावनापूर्ण और हास्यास्पद है। जनता इन दोहरे मापदंडों को अच्छी तरह समझ रही है।
--आईएएनएस
पीएसके/एबीएम
