राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर बोले इस्कॉन के प्रवक्ता राधा रमण दास बोले, ट्रस्टियों की निगरानी जरूरी
कोलकाता, 15 जून (आईएएनएस)। अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चढ़ावे में कथित घोटाले को लेकर एसआईटी का गठन किया गया है और जांच प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी बीच इस्कॉन के वाइस प्रेसिडेंट और प्रवक्ता राधा रमण दास ने जल्द जांच के आदेश देने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि ट्रस्टी मॉनीटरिंग रखें ताकि श्रद्धालु का एक पैसा भी मंदिर से बाहर न जाए। चढ़ावे के पैसे का इस्तेमाल सिर्फ भगवान और सनातन धर्म के लिए ही किया जाए।
राधा रमण दास ने आईएएनएस से कहा कि आस्था की किसी भी जगह, खासकर पूरे भारत के मंदिरों में, लोग गहरी श्रद्धा, प्रेम और सम्मान के साथ जाते हैं। भक्त मंदिरों और पवित्र स्थानों पर आते हैं और इस उम्मीद के साथ दान देते हैं कि उनके दान का इस्तेमाल मंदिर के प्रबंधन, सनातन धर्म और खासकर भगवान की सेवा के लिए किया जाएगा। मंदिर के सभी लोग जो मॉनीटर कर रहे हैं, खासकर ट्रस्टी को ध्यान देना चाहिए कि मंदिर में चढ़ावे का किसी प्रकार का दुरुपयोग न हो। यह बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस्कॉन में भी यह बड़ा चैलेंज रहता है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या का श्रीराम मंदिर करीब 500 साल बाद बना है। लोगों के प्रेम और आस्था का केंद्र है। मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रहे विवाद को लेकर जांच हो रही है, हालांकि मुझे तथ्य की जानकारी नहीं है।
राधा रमण दास ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने जांच बैठाई है। इस बात को लेकर साधुवाद देता हूं कि जानकारी मिलने के तुरंत बाद जांच शुरू हो गई है। मैं यही आशा करूंगा कि लोगों की आस्था के केंद्र श्रीराम मंदिर के एक-एक रुपए चढ़ावे का पैसा किसी तरह से किसी के घर में न जाए। उसका इस्तेमाल मंदिर के कार्य और सनातन धर्म के लिए ही हो।
इस्कॉन के वाइस प्रेसिडेंट और प्रवक्ता राधा रमण दास कहते हैं कि हम जानते हैं कि कई लोग सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। वे लगातार सवाल उठाते रहते हैं और इसे लेकर फिल्में या नैरेटिव भी बनाते हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि जांच जल्द से जल्द पूरी हो।
इस्कॉन के वाइस प्रेसिडेंट ने कहा कि धर्मग्रंथों में कहा गया है कि जो कोई भी मंदिर से पैसे चुराता है, उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं और नरक जाना पड़ता है। कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि यह काम कितना गंभीर है। इंसान कड़ी मेहनत से पैसे कमाता है और भक्त गहरी आस्था के साथ मंदिरों में दान देने के लिए दूर-दूर से, यहां तक कि विदेशों से भी आते हैं। अगर कोई उस पैसे का इस्तेमाल अपनी ऐशो-आराम या निजी फायदे के लिए करता है तो यह पूरी तरह गलत है।
उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि यह कलियुग है और बहुत तरह के लोग आते हैं। कई ऐसे कर्मचारी बन जाते हैं जिनमें किसी प्रकार की आस्था ही नहीं होती है। यह पहचान करना मुश्किल हो जाता कि व्यक्ति जो आ रहा है वह सही भक्त है या नहीं। इसीलिए ट्रस्टी का दायित्व बन जाता है कि वह निगरानी रखे। तकनीक का पूरा इस्तेमाल करना चाहिए ताकि किसी भक्त का एक पैसा भी मंदिर से बाहर न जाए। वह पैसा भगवान और सनातन धर्म के लिए ही इस्तेमाल हो।
--आईएएनएस
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