रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में एचएएल करेगा 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत की स्वदेशी रक्षा और विमानन निर्माण क्षमता के लिए 6 अक्टूबर का दिन काफी महत्वपूर्ण होने जा रहा है। 6 अक्टूबर को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से निर्मित 2,000वें एयरो-इंजन की ऐतिहासिक डिलीवरी होनी है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के कोरापुट प्रभाग से निर्मित 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी का उद्घाटन करेंगे। यह उपलब्धि एचएएल कोरापुट की करीब छह दशक लंबी यात्रा और देश की रक्षा उत्पादन क्षमता में उसके योगदान को रेखांकित करेगी।
कोरापुट स्थित एचएएल प्रभाग ने पिछले कई दशकों में भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है। यहां तैयार किए गए एयरो-इंजनों ने देश की विमानन और रक्षा प्रणालियों को आवश्यक शक्ति देने के साथ भारत की स्वदेशी विनिर्माण क्षमता को मजबूत किया है। 2,000वें इंजन की डिलीवरी इसी लंबी यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है। कार्यक्रम में ‘शक्ति’ इंजनों की दूसरी उत्पादन लाइन की स्थापना को भी प्रमुखता से रेखांकित किया जाएगा।
इसके लिए 218 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। नई उत्पादन क्षमता का उद्देश्य देश में विकसित हेलीकॉप्टरों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करना है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘शक्ति’ इंजन का इस्तेमाल भारतीय हेलीकॉप्टर प्लेटफार्म में किया जाता है। इनमें ध्रुव उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर और प्रचंड हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर शामिल हैं। दूसरी उत्पादन लाइन शुरू होने से इन हेलीकॉप्टरों के लिए इंजन उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी और स्वदेशी हेलीकॉप्टर कार्यक्रमों को आवश्यक गति मिल सकेगी।
दरअसल, एयरो-इंजन किसी भी विमान या हेलीकॉप्टर की सबसे महत्वपूर्ण प्रणालियों में से एक होता है। इसकी तकनीक अत्यंत जटिल होती है और इसे विकसित करने के लिए उच्च स्तर की इंजीनियरिंग, मटैरियल साइंस, निर्माण तकनीक और परीक्षण क्षमता की आवश्यकता होती है। ऐसे में देश में एयरो-इंजन निर्माण की क्षमता बढ़ना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
कोरापुट में होने वाला यह कार्यक्रम सरकार के उस व्यापक दृष्टिकोण को भी सामने रखेगा, जिसके तहत भारत को केवल रक्षा उपकरण खरीदने वाले देश से आगे बढ़ाकर रक्षा प्रणालियों के डिजाइन, विकास और निर्माण में सक्षम देश बनाया जा रहा है। स्वदेशी एयरो-इंजन क्षमता इस लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इंजन तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ने से भविष्य में विमान और हेलीकॉप्टर निर्माण के साथ-साथ उनके रखरखाव और परिचालन क्षमता को भी मजबूती मिल सकती है।
एचएएल कोरापुट का योगदान केवल 2,000वें इंजन तक सीमित नहीं है। करीब छह दशकों में इस प्रभाग ने देश की एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारी को भी समर्थन मिला है।
ऐसे समय में जब भारत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को तेजी से बढ़ा रहा है, 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी देश की लंबी औद्योगिक यात्रा और भविष्य की महत्वाकांक्षाओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आएगी। इस कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और एचएएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रवि के. सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
--आईएएनएस
जीसीबी/डीकेपी
