Aapka Rajasthan

रक्षा क्षेत्र में सेमीकंडक्टर व वायरलेस संचार तकनीक को बढ़ावा दे रहा डीआरडीओ

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारत को सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी के चिप के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अपनी तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। इस दौरान रडार, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आधुनिक संचार उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली कई स्वदेशी तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। यह आयोजन नई दिल्ली में किया गया। यहां विषय पर विशेष सत्र का नेतृत्व डीआरडीओ ने किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर को इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था।
 

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारत को सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी के चिप के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अपनी तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। इस दौरान रडार, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आधुनिक संचार उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली कई स्वदेशी तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। यह आयोजन नई दिल्ली में किया गया। यहां विषय पर विशेष सत्र का नेतृत्व डीआरडीओ ने किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर को इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इसमें 12 मंत्रालयों और विभागों की भागीदारी रही। सत्र में उद्योग, शिक्षण संस्थानों और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसमें एआई आधारित चिप, नई माइक्रोप्रोसेसर तकनीक और स्वदेशी चिप विकास पर चर्चा हुई। 29 अक्टूबर तक चले इस कार्यक्रम में डीआरडीओ ने दो महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर तकनीकों का प्रदर्शन किया। इनमें मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट (एमएमआईसी) और इन्फ्रारेड फोकल प्लेन एरे (आईआरएफपीए) शामिल हैं। इन्हें दिल्ली स्थित सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी ने विकसित किया है।

गैलियम आर्सेनाइड और गैलियम नाइट्राइड आधारित एमएमआईसी का इस्तेमाल आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों में होता है। वहीं, आईआरएफपीए तकनीक को मिसाइलों की आंख भी कहा जा सकता है। यह लक्ष्य से निकलने वाली गर्मी को पहचानकर उसकी तस्वीर तैयार करती है। इससे मिसाइल को उड़ान के अंतिम चरण में लक्ष्य की पहचान और उसका पीछा करने में मदद मिलती है। इसके शॉर्ट वेव, मिड वेव और लॉन्ग वेव संस्करण भी प्रदर्शित किए गए।

डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट इंजन, न्यूरोमॉर्फिक एक्सेलरेटर, उन्नत संचार प्रणाली, क्वांटम रैंडम नंबर जनरेटर, फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट और लेजर निकटता सेंसर भी दिखाए। सैनिकों के लिए विशेष ठंड-रोधी कपड़े, ‘प्रबला’ महिला फुल बॉडी प्रोटेक्टर और निष्क्रिय एवं बिजली से चलने वाले एक्सोस्केलेटन भी प्रदर्शनी का हिस्सा रहे। वहीं डीआरडीओ ने सैन्य उपयोग के लिए वायरलेस संचार तकनीक पर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘विकॉम-26’ आयोजित किया है।

30 और 31 अक्टूबर के इस दो दिवसीय सम्मेलन में भारत और अमेरिका के विशेषज्ञों के साथ कुल 103 शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इसमें सैन्य संचार, रेडियो तकनीक, एंटीना और संकेत प्रसंस्करण जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है। साथ ही भारतीय कंपनियों ने संचार प्रणालियों, परीक्षण उपकरणों और सॉफ्टवेयर से जुड़ी स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन भी किया है।

नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में संचार प्रणाली केवल बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि सैनिकों की स्थिति की जानकारी, सैन्य टुकड़ियों के बीच तालमेल और तेजी से फैसले लेने के लिए भी जरूरी है।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी