सी.पी. राधाकृष्णन ने ओरिएंटेशन कार्यक्रम में नए सांसदों को संसदीय परंपराओं और नियमों की दी जानकारी
नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को राज्यसभा के नवनिर्वाचित और नामित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम 'प्रारंभ' का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राज्यसभा के महासचिव पी.सी. मोदी, कई सांसद और राज्यसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य नए सदस्यों को संसद की कार्यप्रणाली, नियमों, संसदीय परंपराओं और आधुनिक तकनीकों की जानकारी देना है, ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों का बेहतर ढंग से निर्वहन कर सकें।
कार्यक्रम की शुरुआत उपसभापति हरिवंश के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि नए सदस्य ऐसे समय संसद में आए हैं, जब देश 'अमृत काल' में प्रवेश कर चुका है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य सामने है। उन्होंने कहा कि सांसदों की जिम्मेदारी केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार को जवाबदेह ठहराना, जनहित के मुद्दे उठाना, रचनात्मक सुझाव देना और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
अपने उद्घाटन भाषण में सी.पी. राधाकृष्णन ने नवनिर्वाचित और नामित सदस्यों को बधाई देते हुए बताया कि इस बार 67 सदस्य पहली बार राज्यसभा पहुंचे हैं। उन्होंने सप्ताहांत के बावजूद कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी की सराहना करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसदीय जिम्मेदारियों के प्रति उनकी गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने राज्यसभा को भारत के संघीय लोकतंत्र की आधारशिला बताते हुए कहा कि यह सदन देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर एक मंच देता है। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य अलग-अलग विचारधाराओं से हो सकते हैं, लेकिन वे एक संविधान, एक सोच 'राष्ट्र प्रथम' और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साझा लक्ष्य से जुड़े हुए हैं।
सभापति ने कहा कि संसद में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन सभी सांसदों की सर्वोच्च निष्ठा संविधान और देश के लोगों के प्रति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बहस, चर्चा और यहां तक कि विरोध का भी उद्देश्य किसी सार्थक निर्णय तक पहुंचना होना चाहिए। अगर व्यवधान के कारण चर्चा ही नहीं हो पाती, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और उसका उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।
उन्होंने प्रश्नकाल और शून्यकाल को सांसदों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि इनकी गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सदस्यों से संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं का गहराई से अध्ययन करने की अपील की। विशेष रूप से उन्होंने नियम 267 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रावधान का उपयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में और सदन की सहमति से ही किया जाना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर बात करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि चुनाव वोटों से जीते जाते हैं, लेकिन जनता का सम्मान केवल सेवा और ईमानदार काम से हासिल होता है। उन्होंने कहा कि सांसदों द्वारा पूछा गया हर सवाल, बनाई गई हर नीति, पारित किया गया हर कानून और सदन में की गई हर चर्चा लाखों लोगों के जीवन पर सकारात्मक असर डाल सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा पीढ़ी के सांसदों के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देने का ऐतिहासिक अवसर है।
उन्होंने अपने संसदीय अनुभव साझा करते हुए बताया कि लोकसभा सदस्य और कपड़ा मामलों की संसदीय उपसमिति के संयोजक के रूप में काम करते समय समिति की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार ने टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम लागू की थी, जिससे कपड़ा उद्योग के आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल, शून्यकाल या संसदीय समितियों में दिया गया एक छोटा-सा सुझाव भी भविष्य में बड़ी नीतिगत पहल का आधार बन सकता है।
सभापति ने सांसदों को लगातार अध्ययन और तैयारी की आदत विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि वे स्वयं सदन की प्रत्येक बैठक से पहले दिन के कार्यसूची और संबंधित नियमों का अध्ययन करते हैं। उन्होंने नए सदस्यों से विधायी प्रक्रिया, बजट, संसदीय समितियों, परंपराओं और संसदीय आचरण की पूरी जानकारी हासिल करने का आग्रह किया।
उन्होंने कार्यक्रम के लिए तैयार किए गए व्यापक प्रशिक्षण मॉड्यूल की सराहना करते हुए कहा कि इसमें आधुनिक तकनीक और डिजिटल संसदीय कार्यप्रणाली को भी शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में पहली बार सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े उपकरणों पर व्यावहारिक कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि संसद अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में प्रवेश कर चुकी है और 'वाणी सेतु' जैसे एआई आधारित उपकरण राज्यसभा में कई भारतीय भाषाओं में रियल-टाइम अनुवाद की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने सदस्यों से भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (एनएलपी) जैसी नई तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया।
अपने संबोधन के अंत में सी.पी. राधाकृष्णन ने सभी नए सदस्यों के सफल संसदीय कार्यकाल की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि यह ओरिएंटेशन कार्यक्रम उन्हें संसद की कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझने और देश की प्रभावी सेवा करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेगा।
--आईएएनएस
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