राज्यसभा में खड़गे-रिजिजू के बीच तीखी बहस, संसदीय कार्य मंत्री बोले -गृह मंत्री सुबह से रात तक संसद परिसर में मौजूद रहते हैं
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। राज्यसभा में शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी और उनके बयान को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री से सदन में आकर बयान देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सभापति की बात का भी सम्मान नहीं किया जा रहा है।
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि किस विषय पर कौन मंत्री सदन में जवाब देगा। पक्ष और विपक्ष के बीच हुए इस जबरदस्त टकराव के कारण राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 और फिर सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित हो गई।
दरअसल विपक्ष, प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बल के उपयोग विरोध कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि जंतर मंतर पर 20 जुलाई को अनुचित तरीके से छात्रों पर पुलिस ने बल का प्रयोग किया और वे गृहमंत्री से इस पर जवाब मांग रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति को संबोधित करते हुए कहा कि गृह मंत्री को सदन में आना चाहिए। मुझे और कुछ नहीं कहना। हमने पहले भी यह बात कही थी कि गृह मंत्री सदन में आएं और सदन में आकर बयान दें।
खड़गे का कहना था कि सभापति ने विपक्ष की यह भावना संसदीय कार्य मंत्री तक पहुंचाई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सभापति सीपी राधाकृष्णन से कहा कि आपने विपक्ष की भावना संसदीय कार्य मंत्री को बता दी थी, लेकिन इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ। आपकी बात को भी मर्यादा नहीं दी जा रही है। यह सदन का अपमान है।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि संसदीय व्यवस्था में यह स्पष्ट नियम है कि जिस विषय से संबंधित मंत्रालय होता है, उसी मंत्रालय का मंत्री सदन में जवाब देता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि किसी मुद्दे पर कौन मंत्री सदन में उपस्थित होगा।
रिजिजू ने कहा, ''गृहमंत्री सुबह से देर रात तक संसद परिसर में मौजूद रहते हैं, लेकिन सदन में जिस विषय से संबंधित मंत्रालय होता है, उसी मंत्री की जिम्मेदारी होती है कि वह जवाब दे। विपक्ष यह तय नहीं करेगा कि किस विषय पर कौन मंत्री सदन में आएगा। यह अधिकार विपक्ष का नहीं है और ऐसी परंपरा नहीं है।''
उन्होंने यह भी कहा कि सभापति ने केवल विपक्ष की मांग सरकार तक पहुंचाई थी, कोई निर्देश नहीं दिया था। रिजिजू ने कहा, ''सभापति ने विपक्ष की भावना बताई थी, किसी मंत्री को सदन में आने का निर्देश नहीं दिया था।''
संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के सांसद सदन में हंगामा करने के बाद यहां से चले जाते हैं, जबकि गृह मंत्री सुबह से लेकर देर रात तक संसद में मौजूद रहते हैं। उन्होंने कहा कि केवल विपक्ष की मांग के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि हर विषय पर गृहमंत्री ही सदन में जवाब दें।
रिजिजू के जवाब के दौरान विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध किया और सदन में कुछ देर तक शोर-शराबा होता रहा। गृह मंत्री की मौजूदगी को लेकर सरकार और विपक्ष अपने-अपने रुख पर कायम रहे, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। इसको देखते हुए सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे जब सदन की कार्यवाही एक बार दोबारा शुरू हुई तो संसद में यह हंगामा बरकरार रहा, जिसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार, 10 अगस्त, सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
--आईएएनएस
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