राज्यसभा में सीएपीएफ विधेयक 2026 पारित, विपक्ष ने किया वॉकआउट
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। राज्यसभा में बुधवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पारित हो गया। वहीं, विपक्ष ने विधेयक को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की और सदन से वॉकआउट किया। इससे पहले सदन में विधेयक पर हुई चर्चा व विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे और संविधान की भावना के विरुद्ध नहीं है। यह संघीय ढांचे को और मजबूत करता है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल राज्यों में पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय में कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक मुख्यत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के ग्रुप ए अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों के नियमन से संबंधित है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के वित्तीय लाभों की निरंतरता को लेकर कई प्रश्न उठाए गए हैं। गृह राज्य मंत्री ने कहा, ''चर्चा के दौरान अनेक सदस्यों ने इस विधेयक से संबंधित कुछ असंगतियां और प्रश्न उठाए हैं। सबसे पहले यह कहा गया कि यह विधेयक संघीय ढांचे और संविधान की भावना के विरुद्ध है।''
उन्होंने कहा, “मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह बिल्कुल सही नहीं है। वास्तव में यह विधेयक संघीय ढांचे को और मजबूत करता है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विभिन्न राज्यों में राज्य पुलिस और प्रशासन के साथ निकट समन्वय में कार्य करते हैं। ऐसे में विभिन्न राज्यों में कार्य करने का अनुभव रखने वाले अधिकारियों की उपस्थिति से केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होता है, जिससे आंतरिक सुरक्षा प्रबंधन में एक समन्वित राष्ट्रीय दृष्टिकोण विकसित होता है।”
कुछ सदस्यों ने यह भी आशंका व्यक्त की कि इस विधेयक के माध्यम से अत्यधिक शक्तियां प्रदान की जा रही हैं और यह अत्यधिक प्रत्यायोजन का उदाहरण है। गृह राज्यमंत्री ने कहा कि वह यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि विधेयक में दिए गए प्रावधान एक स्थापित विधायी तकनीक का हिस्सा हैं, जो व्यापक रूप से स्वीकार्य और प्रचलित है। इसका उद्देश्य केवल प्रशासनिक विषयों में स्पष्टता और सुसंगतता सुनिश्चित करना है।
चर्चा में यह भी कहा गया कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों के प्रमोशन में ठहराव आएगा। इस पर गृह राज्यमंत्री का कहना था कि वह स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि ग्रुप ए जनरल ड्यूटी अधिकारियों को सामान्यत सेवा अवधि में चार पदोन्नतियां प्राप्त होती हैं। आयु के आधार पर कई अधिकारियों को पांचवी पदोन्नति का अवसर भी मिलता है। विभागीय पदोन्नति समितियों का नियमित आयोजन किया जाता है, जिससे समय पर पदोन्नति सुनिश्चित होती है। जहां कहीं पदोन्नतियां लंबित रहती हैं, उसके मुख्य कारण न्यायालयों में लंबित मामले, वरिष्ठता से जुड़े विवाद, सतर्कता स्वीकृति में देरी या अनुशासनात्मक कार्रवाई होती हैं।
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भर्ती प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए सुधार किए गए हैं। पहले जहां भर्ती प्रक्रिया में लगभग डेढ़ से दो वर्ष लगते थे, वहीं अब इसे सरल बनाकर लगभग 10 से 11 महीनों में पूरा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक न केवल प्रशासनिक स्पष्टता लाएगा, बल्कि आंतरिक सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाएगा। गृह राज्यमंत्री का कहना था कि आज हमारे सुरक्षाकर्मियों, जवानों और अधिकारियों का मनोबल बढ़ा है। आज हमारी पैरामिलिट्री फोर्स हर प्रकार से सीमा सुरक्षा से लेकर देश की आंतरिक सुरक्षा तक, सक्षम और सुदृढ़ भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश के हित में है, हमारी सीमाओं की सुरक्षा के हित में है, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के हित में है और देश की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
--आईएएनएस
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