राज्यमंत्री संजय सेठ ने 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' की बात कही
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। समुद्र में संकट में फंसे लोगों की जान बचाने और खोज एवं बचाव अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए भारत अपनी तैयारियों को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 7 अक्टूबर को बहुराष्ट्रीय खोज एवं बचाव अभ्यास ‘सैरेक्स-2026’ का उद्घाटन किया। सैरेक्स एक बहु-एजेंसी समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास है। इसका उद्देश्य संकट की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई को परखना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना और बचाव अभियानों की तैयारियों को मजबूत करना है।
संजय सेठ ने यहां ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ की भावना का उल्लेख करते हुए सभी देशों और एजेंसियों से समुद्र में जीवन की रक्षा के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने भारतीय तटरक्षक बल के आदर्श वाक्य ‘वयम् रक्षामः’ यानी ‘हम रक्षा करते हैं’ का भी उल्लेख किया। सैरेक्स-2026 से पहले 7 अक्टूबर को 24वीं राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड की बैठक भी हुई। इसकी अध्यक्षता भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक और राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड के अध्यक्ष परमेश शिवमणि ने की।
बैठक में भारत के करीब 46 लाख वर्ग किलोमीटर के समुद्री खोज एवं बचाव क्षेत्र में तैयारियों की समीक्षा की गई। इसमें तकनीक के बेहतर इस्तेमाल, संकट के संदेशों को तुरंत संभालने, जहाजों की निगरानी, वास्तविक समय में सूचना साझा करने और अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पिछले बचाव अभियानों और अभ्यासों से मिली सीख का इस्तेमाल आगे की तैयारियों में किया जाना चाहिए। इससे संकट के समय बचाव दल तेजी से कार्रवाई कर सकेंगे।
इस मौके पर संजय सेठ ने कहा कि समुद्र में सुरक्षा की जिम्मेदारी किसी एक एजेंसी की नहीं है। इसके लिए नौसेना, तटरक्षक बल, वायुसेना, तटीय पुलिस, बंदरगाहों, नागरिक एजेंसियों और समुद्री परिवहन क्षेत्र को मिलकर काम करना होता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय भागीदारों का सहयोग भी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
रक्षा राज्य मंत्री ने भारत की उपग्रह आधारित खोज एवं बचाव क्षमता में हुई प्रगति को भी रेखांकित किया। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और इससे जुड़े सभी दलों को बधाई दी। संजय सेठ ने कहा कि समुद्र में किसी की जान बचाने के लिए हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है, इसलिए आने वाले समय में भारत की खोज एवं बचाव व्यवस्था को और तेज, सटीक और मजबूत बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक और तकनीकी रूप से मजबूत भारत बनाना नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित और मजबूत समुद्री राष्ट्र बनना भी है। बैठक के दौरान राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव पुरस्कार-2026 भी प्रदान किए गए। इन पुरस्कारों के जरिए समुद्र में लोगों की जान बचाने के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रयासों को सम्मानित किया गया।
--आईएएनएस
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