महंगी कोचिंग नहीं, सेल्फ स्टडी से नीट में चमकी शामली की द्राक्षा, डॉक्टर बनने का सपना होगा साकार
शामली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के शामली जिले की एक छात्रा ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी मेहनत और लगन के दम पर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में सफलता हासिल कर प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।
थानाभवन क्षेत्र के सोंटा रसूलपुर गांव की रहने वाली द्राक्षा ने बिना किसी महंगी कोचिंग के केवल सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन माध्यम से तैयारी करते हुए ऑल इंडिया रैंक 16,632 प्राप्त की है। अब वह डॉक्टर बनने के अपने सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
द्राक्षा के पिता रागिब पेशे से राजमिस्त्री हैं। सीमित आय और आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। साधारण परिवेश में पली-बढ़ी द्राक्षा ने कठिन परिस्थितियों को अपनी मंजिल के बीच आने नहीं दिया और लगातार मेहनत कर सफलता हासिल की।
द्राक्षा ने आईएएनएस से बात करते हुएकहा, "मुझे बचपन से डॉक्टर बनने की इच्छा थी। दूसरे पेशे भी अच्छे हैं, लेकिन मुझे हमेशा डॉक्टरों का काम प्रेरित करता था। स्कूल के दिनों से ही मेरा झुकाव विज्ञान विषय की ओर था, इसलिए मैंने इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया।"
उन्होंने बताया कि परिवार और शिक्षकों ने हर कदम पर साथ दिया। उनके पिता की मेहनत ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया। द्राक्षा ने कहा, "मेरे पिता राजमिस्त्री हैं और उन्होंने हमेशा कड़ी मेहनत की है। उन्हें संघर्ष करते देखकर मुझे भी मेहनत करने और अपने लक्ष्य तक पहुंचने की प्रेरणा मिली।"
महंगी कोचिंग का खर्च वहन करना परिवार के लिए संभव नहीं था, इसलिए द्राक्षा ने इंटरनेट और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री का सहारा लिया। उन्होंने शुरुआत में प्रतिदिन 13 से 14 घंटे तक पढ़ाई की। बाद में उन्होंने समय के बजाय लक्ष्य आधारित तैयारी पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने जो लक्ष्य तय किया था, परिणाम भी उसी के अनुरूप मिला।
द्राक्षा की मां ने बताया कि उनकी बेटी शुरू से पढ़ाई में होनहार रही है। उन्होंने कहा, "हमने हमेशा उसकी पढ़ाई को प्राथमिकता दी। मैं घर का काम करती हूं और मेरे पति राजमिस्त्री हैं। आर्थिक कठिनाइयां थीं, लेकिन बेटी मेहनती थी, इसलिए हमने भी हरसंभव प्रयास किया कि उसकी पढ़ाई जारी रहे।"
--आईएएनएस
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