रेलवे संपत्ति से यात्रियों की सुरक्षा तक, 1882 से 2026 तक जानिए कैसा रहा आरपीएफ का सफर
नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। रेलवे का रखरखाव और सुरक्षा, राष्ट्रीय संचार और आर्थिक प्रगति की महत्वपूर्ण धमनी, हर सरकार की एक प्रमुख चिंता रही है, हालांकि रेलवे में अपराध नियंत्रण के प्रयास लगभग उतने ही पुराने हैं, जितना कि रेलवे का इतिहास। अलग-अलग राज्यों में रेलवे का जाल फैला और ऐसे में पूर्ण सुरक्षा प्रणाली लागू करना बेहद मुश्किल हो जाता है। फिर भी चुनौतियों से निपटने के प्रयासों का पता 1854 से लगाया जा सकता है, जब पूर्वी भारतीय रेलवे ने पुलिस अधिनियम-1861 को लागू किया गया।
शुरुआती दौर में रेलवे ने अपने स्वयं के बल को दर्शाने के लिए 'पुलिस' के रूप में नामित कुछ कर्मचारियों को नियुक्त किया। उस दौर में निजी रेलवे कंपनियां हुआ करती थीं। बाद में रेलवे पुलिस समिति-1872 की सिफारिश पर रेलवे पुलिस को 'सरकारी' के रूप में संगठित किया गया था।
1882 तक रेलवे में तैनात पुलिस बल के औपचारिक विभाजन के परिणामस्वरूप 'सरकारी पुलिस' और 'निजी (कंपनी) पुलिस' के रूप में रेलवे कंपनियों ने सीधे अपनी संपत्ति के साथ-साथ जनता के सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली।
1882 के समय को ही रेलवे सुरक्षा बल का इतिहास माना जाता है, जब विभिन्न रेलवे कंपनियों ने रेलवे संपत्तियों की सुरक्षा के लिए अपने सुरक्षा बल नियुक्त किए थे।
1940 के दशक के मध्य में रेलवे कंपनियों के नियंत्रण में बचे 'वॉच एंड वार्ड' कर्मचारियों का दल उनकी संपत्तियों और माल की चोरी को रोकने के लिए असफल रहा। इसके बावजूद 1954 तक यह व्यवस्था जारी रही।
1954 में तत्कालीन खुफिया ब्यूरो निदेशक की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने 'वॉच एंड वार्ड' को एक वैधानिक निकाय के रूप में पुनर्गठित करने की सिफारिश की। इसी के परिणामस्वरूप आरपीएफ अधिनियम-1957 लागू हुआ।
स्वतंत्रता के बाद के युग में रेलवे प्रणाली में व्यापक परिवर्तन हुए। निजी रेलवे का पुनर्गठन करके नौ क्षेत्रीय रेलवे बनाए गए। रेल संचालन के समग्र स्वरूप में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए। रेलवे में बेहतर सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था की जरूरतों को देखते हुए रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम 1966 में पारित किया गया।
इसके बाद भी लगातार यह महसूस किया जा रहा था कि रेलवे सुरक्षा बल को 'संघ के एक सशस्त्र बल' का दर्जा देने की जरूरत है। अंत में संसद के जरिए आरपीएफ अधिनियम में संशोधन करके 20 सितंबर 1985 को रेलवे सुरक्षा बल को यह दर्जा दिया गया।
इससे आरपीएफ को सशस्त्र बल का दर्जा प्राप्त हुआ और इसके कामकाज में आमूलचूल परिवर्तन आया। इस अधिनियम के पारित होने से आरपीएफ को अन्य बलों के साथ काम करने का अवसर मिला। राज्य पुलिस बलों की सहायता के लिए नियमित रूप से तैनात किए जाने से यह बल परिपक्व हुआ।
इसलिए रेलवे सुरक्षा बल के सदस्यों और उनके परिवारों की ओर से हर साल 20 सितंबर को आरपीएफ के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्तमान में रेलवे सुरक्षा बल ने न सिर्फ रेलवे संपत्ति की सुरक्षा की बल्कि रेल यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विश्वसनीय प्रदर्शन किया है।
--आईएएनएस
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