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'राहुल गांधी सिर्फ अराजकता में विश्वास करते हैं', स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देकर बरसे भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया

नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने मंगलवार को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत इंडिया ब्लॉक को निशाने पर लिया। उन्होंने एक निजी टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए कहा कि इस स्टिंग ऑपरेशन से यह साफ हो गया है कि इनके तार विपक्षी दलों से जुड़े हैं।
 

नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने मंगलवार को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत इंडिया ब्लॉक को निशाने पर लिया। उन्होंने एक निजी टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए कहा कि इस स्टिंग ऑपरेशन से यह साफ हो गया है कि इनके तार विपक्षी दलों से जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जैसे नेता अराजकता और विनाश में विश्वास रखते हैं। यही वजह है कि उन्हें अक्सर 'भस्मासुर' कहा जाता है। राहुल गांधी एक ऐसे नेता बन गए हैं, जो लोकतंत्र को कमजोर करना चाहते हैं और हर जगह केवल अराजकता फैलाना चाहते हैं। जैसा कि हम देख सकते हैं, आज भारत वैश्विक मंच पर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, पूरी दुनिया भारत की ओर देखती है। अगर भारत की कोई एक बड़ी ताकत है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि वह है एक लोकतांत्रिक सरकार, संविधान के प्रति सम्मान, और वह स्थिरता जिसे हमने पिछले 12 वर्षों से बनाए रखा है।

उन्होंने आगे कहा कि दूसरी ओर, भारत में एक ऐसा विपक्ष है, जिसकी सोच अराजक है और जो संविधान-विरोधी है। वे सत्ता परिवर्तन की बात करते हैं और कहते हैं कि वे सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। वे सरकार को कैसे उखाड़ फेंकेंगे? मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ आपके सामने यह बात रखना चाहता हूं। एक बहुत बड़े और विश्वसनीय मीडिया हाउस ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया। इस स्टिंग ऑपरेशन से सामने आए तथ्यों पर हर दिन अलग-अलग टीवी चैनलों पर चर्चा हुई। देश भर के नागरिक इन पर चर्चा कर रहे थे। अब यह सामने आ गया है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व वाले इन अराजक तत्वों का असली मॉडल क्या है।

भाटिया ने कहा कि एक बहुत लोकप्रिय सीरीज है, जिसमें मुख्य किरदार सत्ता के लिए पूरी तरह पागल है। वह कहता है, 'मुझे सिंहासन पर बैठना है। मैं सिंहासन पर बैठकर ही रहूंगा, भले ही इसके लिए पूरा देश जल जाए और अगर मैं राख का राजा बनता हूं, तो मैं राख पर ही राज करुंगा। मैं राख का शासक बनूंगा। अगर मुझे देश को जलाना भी पड़े, तो क्या फर्क पड़ता है?' आज विपक्ष के नेता की यही सोच है और उन्हें 'विपक्ष का नेता' कहने में भी मुझे शर्म आती है। राहुल गांधी एक ऐसे नेता बन गए हैं जो लोकतंत्र की हत्या करके और उसका गला घोंटकर अराजकता फैलाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं ने इसे देखा है। सोमवार को हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' नाम के एक मार्च में हिस्सा लिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक मार्च निकाला, जिसमें बड़ी संख्या में लोग उनके साथ शामिल हुए। ऐसा क्यों हो रहा है? ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर कोई एक चीज है, जिसे भारत और भारतीय नापसंद करते हैं और जिससे नफरत करते हैं, तो वह है अराजकता और हिंसक विरोध-प्रदर्शन। स्वभाव से ही, भारतीयों का संविधान में विश्वास है और वे अराजकता को अपने पैरों तले कुचल देते हैं। हिंसक विरोध-प्रदर्शन भारतीयों के डीएनए में नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि मैंने पहले कहा था, अब मैं कुछ ऐसे अराजक तत्वों के बारे में बात करना चाहता हूं, जिनके तार कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों से जुड़े हैं और जो हिंसक विरोध-प्रदर्शनों में भी शामिल हैं। इनमें से पहला व्यक्ति मौलाना सिराज खान है। मैं आपके सामने उसके बयान रखूंगा और उस बड़े संदेश को समझाऊंगा, जो मैं इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए देना चाहता हूं। आप देखेंगे कि भारतीय जनता पार्टी और भारत के नागरिक जो बातें कहते आ रहे थे, वे अब एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए सच साबित हो रही हैं। इस स्टिंग ऑपरेशन ने पर्दे के पीछे चल रही साजिशों को सबके सामने ला दिया है। इससे पता चलता है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल, संविधान की शपथ लेने के बावजूद, अपने दिलों में 'भारत माता' के प्रति कितना जहर और नफरत पाले हुए हैं। वे जहरीले सांपों की तरह हैं।

भाटिया ने स्टिंग ऑपरेशन का जिक्र करते हुए कहा कि पहला व्यक्ति है मौलाना सिराज खान। जो जमीयत उलेमा ए हिंद के मुंबई प्रमुख हैं। वह कहते हैं कि 'मोमिन जिस दिन खड़ा होगा, किसी के संभाले, संभलेगा नहीं।' सड़क पर फ्रांस जैसे हिंसक प्रदर्शनों के सवाल पर यह उनका वक्तव्य था। फ्रांस में हमने देखा कि वहां हिंसक प्रदर्शन हुए, लूटपाट और आगजनी हुई। ये अपने वक्तव्य में कहते हैं कि मुस्लिम-हिंदू एकता को खत्म किया जा रहा है। पहला मतलब हिंसक प्रदर्शन किया जाएगा, लूटपाट और आगजनी की जाएगी, और जो हमारा देश एकता और अखंडता एवं सौहार्द से रहता है, ये उसको तोड़ने की बात कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दूसरा किरदार है शाफवान जो मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन का डीयू अध्यक्ष है। इन्होंने स्पष्ट कहा कि लंबे समय तक कोई सुरक्षित नहीं रहेगा। 20 जुलाई जैसे हालात अगर दोबारा बने, तो नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थितियां आ जाएंगी। भाटिया इसी तरह अन्य स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े लोगों का जिक्र कर राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर गंभीर सवाल उठाते हैं। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि विपक्ष हिंसा और अराजकता से तख्ता पलटना चाहता है। इससे यह बात साफ हो जाती है, वोट के माध्यम से नहीं लोकतंत्र को चोट के माध्यम से तख्ता पलटना चाहते हैं। अखिलेश यादव 2027 का विधानसभा चुनाव हारेंगे, और भारत के मजबूत लोकतंत्र पर ये दगे कारतूस चोट नहीं कर पाएंगे।

भाटिया ने कहा कि इस स्टिंग ऑपरेशन के कुछ मुख्य संदेश कुछ ऐसे हैं कि एक विध्वंसक मॉडल, जो राहुल गांधी को पसंद है। वो बनाने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन तोड़ने में, खत्म करने में, राख में मिला देने में अव्वल भूमिका निभाते हैं। हिंसा से उन्हें कोई गुरेज नहीं है। महिलाओं को आगे करना। ये बहुत ही निम्नस्तरीय, घटिया और ओछी सोच है। हमारे मजबूत लोकतंत्र में महिलाओं को भी वस्तु समझकर उनका इस्तेमाल करना, उन्हें एक मोहरा बना देने की साजिश है, और जिस प्रकार राहुल गांधी ने महिला पुलिसकर्मी को गलत तरीके से छुआ, उत्पीड़न किया, वो अपने आप में चिंताजनक है। इसके साथ ही वह एक और बात कहते हैं, जिसे हम कई बार उठा चुके हैं। उनका कहना है कि जब कोई विरोध प्रदर्शन होता है तो पुलिस पुरुष प्रदर्शनकारियों से तुरंत निपट लेती है। लेकिन हमने एक रणनीति भी बनाई है। यह जहरीली रणनीति किसकी हो सकती है? यह राहुल गांधी की सोच है। वह कहते हैं, 'सामने महिलाओं की दीवार खड़ी करो।' उनका कहना है कि इससे फायदे होंगे। सबसे पहले, पुलिस जिम्मेदार है, और भारत में पुलिस, विशेष रूप से दिल्ली पुलिस, महिलाओं के साथ व्यवहार करते समय संयम बरतती है।

उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र के खिलाफ हो रही साजिश में राहुल गांधी मुख्य किरदार निभा रहे हैं। राहुल गांधी हाथ में संविधान लेकर चलते हैं। लेकिन, संविधान को नहीं मानते हैं। चुनाव आयोग से इतनी दिक्कत है तो संविधान के अनुसार, संसद में मुद्दा क्यों नहीं उठाते हैं?

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम