'राहुल गांधी को विकल्प मान रहा पूरा देश', नितिन नवीन पर राजेंद्र पाल गौतम का पलटवार
नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से राहुल गांधी और गांधी परिवार को लेकर की गई टिप्पणियों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने राहुल गांधी को अराजकता पैदा करने की टूलकिट बताए जाने वाले बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग करते हुए सवाल उठाए। इसके अलावा, उन्होंने राजीव गांधी फाउंडेशन को मिलने वाली विदेशी फंडिंग को लेकर भाजपा के आरोपों और पिछले साढ़े बारह वर्षों में सामाजिक सद्भाव को लेकर सोनिया गांधी की ओर से की गई आलोचना पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। गौतम ने कहा कि भाजपा के नेता राहुल गांधी को लेकर लगातार बयान दे रहे हैं, क्योंकि पूरा देश उन्हें एक विकल्प के रूप में देख रहा है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से राहुल गांधी और गांधी परिवार पर की गई टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि अब नितिन नवीन भी बोलने लगे हैं, यह बड़ी अजीब बात है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या भाजपा नेताओं को सपने में भी राहुल गांधी दिखाई देते हैं? पूरे देश में राहुल गांधी को एक राजनीतिक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में भाजपा के नेताओं की बेचैनी और उनकी लगातार आ रही प्रतिक्रियाओं को देखकर उन्हें खुशी हो रही है।
नितिन नवीन की ओर से राहुल गांधी को अराजकता पैदा करने वाली टूलकिट बताए जाने पर भी कांग्रेस नेता ने भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी के अनुसार देश में अराजकता है और लोकतंत्र खतरे में है, तो क्या नितिन नवीन अपने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से इस्तीफा देने के लिए कहेंगे? आज देश बचाओ, लोकतंत्र बचाओ और सत्ता हटाओ जैसे नारों के साथ धरने-प्रदर्शन हो रहे हैं। यदि सरकार को लगता है कि देश में अराजकता फैल रही है और लोकतंत्र खतरे में है, तो इसकी जिम्मेदारी भी सरकार की बनती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के रहते अगर देश में लोकतंत्र खतरे में है, तो उन्हें अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। गौतम ने चुनाव आयोग की भूमिका का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश और पूरी दुनिया जानती है कि लोकतंत्र के सामने खतरा कौन पैदा कर रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिल्ली को देखकर कबूतर आंखें बंद कर ले, तो इससे उसकी जान नहीं बच सकती। नितिन नवीन को यह बात समझनी चाहिए।
राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री को खुली बहस की चुनौती देने और नितिन नवीन की ओर से यह कहे जाने कि राहुल गांधी को जवाब देने के लिए भाजपा का मंडल अध्यक्ष ही काफी है, इस पर भी राजेंद्र पाल गौतम ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को अपने मंडल अध्यक्ष पर इतना भरोसा है, तो दोनों पार्टियों के मंडल अध्यक्ष आमने-सामने बैठकर बहस कर सकते हैं। मंडल अध्यक्ष की बहस मंडल अध्यक्ष से, जिला अध्यक्ष की जिला अध्यक्ष से, प्रदेश अध्यक्ष की प्रदेश अध्यक्ष से और राष्ट्रीय अध्यक्ष की राष्ट्रीय अध्यक्ष से होनी चाहिए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री स्तर पर भी बहस आयोजित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्तर पर एक-एक घंटे का समय निर्धारित किया जाए और पूरे देश के मीडिया की मौजूदगी में खुली बहस हो। गौतम ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है, तो वे सामने आकर बहस करें।
राजीव गांधी फाउंडेशन को मिलने वाली विदेशी फंडिंग को लेकर नितिन नवीन की ओर से लगाए गए आरोपों पर भी गौतम ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को कुछ जानकारी नहीं होती और उन्हें जो स्क्रिप्ट लिखकर दी जाती है, वे वही पढ़ देते हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग जनता की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले हैं। गौतम ने आरोप लगाया कि भाजपा राम के नाम पर सत्ता तक पहुंची और राम के चढ़ावे की चोरी करने का काम किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप लगाने वाले नेताओं को कांग्रेस गंभीरता से नहीं लेती।
पिछले 12 वर्षों में सामाजिक सद्भाव को संभालने के भाजपा के तरीके पर सोनिया गांधी की आलोचना का समर्थन करते हुए राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि भाजपा ने जाति और धर्म के नाम पर समाज में नफरत का जहर घोलने का काम किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने विविधताओं से भरे देश को एकजुट करने का प्रयास किया था। भारत में हजारों जातियां, अनेक धर्म, भाषाएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन सामाजिक ताने-बाने और आपसी सद्भाव के आधार पर सभी को एक सूत्र में जोड़कर एक भारत बनाया गया था।
गौतम ने आगे कहा कि भाजपा ने अपने साढ़े बारह वर्षों के शासन में इस सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने का काम किया है। देशभर में नफरत फैलने के कारण भारत को एकजुट रखना मुश्किल होता जा रहा है। जाति और धर्म के आधार पर बढ़ती विभाजनकारी राजनीति देश की एकता और सामाजिक सद्भाव के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
--आईएएनएस
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