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'संसद में सोते हैं, बाहर बहस की बात करते हैं', राहुल गांधी की चुनौती पर भाजपा का तीखा तंज

हैदराबाद, 5 नवंबर (आईएएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के प्रधानमंत्री मोदी को बहस की चुनौती देने पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता एनवी सुभाष ने कहा कि राहुल गांधी को विदेश में छुट्टियां मनाने के बजाय ग्रामीण भारत में घूमकर किसानों, युवाओं और महिलाओं की समस्याएं समझनी चाहिए।
 

हैदराबाद, 5 नवंबर (आईएएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के प्रधानमंत्री मोदी को बहस की चुनौती देने पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता एनवी सुभाष ने कहा कि राहुल गांधी को विदेश में छुट्टियां मनाने के बजाय ग्रामीण भारत में घूमकर किसानों, युवाओं और महिलाओं की समस्याएं समझनी चाहिए।

वहीं, तेलंगाना भाजपा प्रवक्ता संदीप साई मोट्टा और राज्य महासचिव तुल्ला वीरेंद्र गौड़ ने कहा कि बहस के लिए संसद ही सही मंच है, लेकिन राहुल गांधी संसद में गंभीर सवाल उठाने के बजाय मजाक करते हैं, सोते हैं या जवाब सुनने से पहले ही बाहर चले जाते हैं।

भाजपा प्रवक्ता एनवी सुभाष ने कहा, "राहुल गांधी को भारत में, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ, और पूरे देश में घूमने-फिरने में अधिक समय बिताना चाहिए। खासकर ग्रामीण भारत के दूरदराज इलाकों में जाना उनके लिए आंखें खोलने वाला अनुभव हो सकता है। इससे उन्हें उन समस्याओं का पता चलेगा, जिनका सामना भारतीयों, विशेषकर किसानों, युवाओं और महिलाओं, को करना पड़ता है। राहुल गांधी संसद में अधिक समय बिताने के बजाय हमेशा किसी गुप्त ठिकाने पर जाने का विकल्प चुनते हैं, वह भी विदेश में, और फिर लौटकर उस पर एक अलग तरह की झूठी कहानी पेश करते हैं।"

उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर बहुत स्पष्ट रूप से, व्यंग्यात्मक अंदाज में कटाक्ष किया है कि वे 57 वर्ष की उम्र में भी सड़क पर उतरते हैं, परिपक्वता और अच्छी समझ का परिचय देने के बजाय वे किशोर की तरह व्यवहार करते हैं, जिससे भारतीय लोगों, भारतीय लोकतंत्र और भारतीय मीडिया का भी अपमान होता है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी उन सभी बातों की निंदा करती है जो राहुल गांधी उन संस्थानों के बारे में कहते हैं, जिन्होंने अच्छा काम किया है। वर्ष 2014 से अब तक, जब से पीएम मोदी इस देश के प्रधानमंत्री बने हैं, इन संस्थानों का प्रदर्शन भी अच्छा रहा है। एक रचनात्मक विपक्षी नेता होने के बजाय, उन्होंने स्वयं को एक विनाशकारी विपक्षी नेता के रूप में साबित किया है। वे अपने पूर्वजों और वरिष्ठों का सम्मान करना भी भूल गए हैं। उनका ध्यान हमेशा केवल गांधी परिवार पर केंद्रित रहता है और भारतीय जनता पार्टी इसकी निंदा करती है।

तेलंगाना भाजपा प्रवक्ता संदीप साई मोट्टा ने कहा कि राहुल गांधी कह रहे हैं कि वे पीएम मोदी से बहस करना चाहते हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आप बाहर बहस क्यों करना चाहते हैं? संसद में आप क्या करते हैं? लोग देख रहे हैं कि जब भी संसद चलती है, आप कोई गंभीर प्रश्न नहीं उठाते। वहां आप या तो मजाक करते रहते हैं या सोते रहते हैं। हमारी संसद वह जगह है, जहां इस देश के सभी सांसदों को प्रश्न पूछने चाहिए। मुझे अब भी समझ नहीं आता कि आप प्रधानमंत्री से बहस क्यों करना चाहते हैं? यदि आपको लगता है कि बहस करके या ऐसा कोई मुद्दा उठाकर आप लोगों को गुमराह कर लेंगे, तो ऐसा नहीं होने वाला।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि लोग आपके एजेंडे के झांसे में नहीं आएंगे। आपकी कही हुई किसी भी बात पर लोग विश्वास नहीं करेंगे। ये सब झूठी बातें हैं। कोई इन पर विश्वास नहीं करता। देश को गुमराह करने की कोशिश मत कीजिए। ऐसा नहीं होगा। कोई भी आपकी बातों के झांसे में नहीं आएगा।

भाजपा तेलंगाना राज्य महासचिव तुल्ला वीरेंद्र गौड़ ने कहा कि आम तौर पर राजनीतिक हलकों में या राजनीतिक मुद्दों से निपटते समय, कई बार हम चुनौतियां देते हैं। यह कोई असामान्य बात नहीं है, जब हम कहते हैं, 'आइए बहस करते हैं, यहां बहस करेंगे, वहां बहस करेंगे।' लेकिन यह उन लोगों पर लागू होता है जो विधानसभाओं या संसद के निर्वाचित सदस्य नहीं हैं। जब आप किसी ऐसे व्यक्ति को बहस के लिए बुलाते हैं, जो संसद का सदस्य नहीं है, तब यह बात लागू होती है। लेकिन जब आप, राहुल गांधी, विपक्ष के नेता के रूप में भारत के प्रधानमंत्री को बहस के लिए बुला रहे हैं, तो मुझे समझ नहीं आता कि इसके पीछे क्या सोच है? विपक्ष के नेता को कौन सलाह दे रहा है कि वे इस तरह की बेकार चुनौतियां दें?

भाजपा तेलंगाना राज्य महासचिव ने कहा कि आपके पास संसद है। संसद वह मंच है, जहां आपको बहस करने, सवाल पूछने, सरकार से सवाल करने का अवसर मिलता है और सरकार को आपके सवालों का जवाब देने का अवसर मिलता है, लेकिन संसद में आने के बजाय, आप अक्सर संसद में नहीं आते। यदि आते भी हैं, तो जवाब सुनने का धैर्य नहीं रखते। यहां तक कि जब आपको पता होता है कि कोई जवाब आपके खिलाफ जा रहा है, तो आप और आपके सभी इंडिया गठबंधन के सहयोगी खड़े होकर संसद से बाहर चले जाते हैं। जब किसी महत्वपूर्ण बहस का मुद्दा सामने आता है, तो आप अपना सामान बांधकर छुट्टियां मनाने विदेश चले जाते हैं।

--आईएएनएस

केके/एबीएम