राहुल गांधी के बयान और पश्चिम बंगाल में मदरसों पर कार्रवाई को लेकर अयोध्या के संतों की प्रतिक्रिया
अयोध्या, 13 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा ब्रिक्स सम्मेलन के गाला डिनर में परोसे गए शाकाहारी भोजन को लेकर की गई टिप्पणी पर अयोध्या के संतों ने प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने कहा था कि "80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं", जिस पर महंत सीताराम दास और महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने आपत्ति जताई है।
महंत सीताराम दास ने कहा कि राहुल गांधी का यह बयान निंदनीय है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह स्वयं शाकाहारी हैं या मांसाहारी। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारतीयों के बारे में गलत धारणा प्रस्तुत कर रहे हैं और उनकी टिप्पणी देश की सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप नहीं है। महंत ने कहा कि राहुल गांधी भारतीय परंपराओं और संस्कृति को सही ढंग से नहीं समझ पाए हैं और उनके बयान से भारतीयों का अपमान होता है।
वहीं, महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी का विरोध करते हुए कहा कि देश के 80 प्रतिशत लोगों को मांसाहारी बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदायों के लोग अपनी-अपनी पसंद के अनुसार भोजन करते हैं और यह व्यक्तिगत विषय है। हालांकि, पूरे देश को मांसाहारी बताना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अपने बयान पर देश से माफी मांगनी चाहिए।
इसी दौरान पश्चिम बंगाल में मदरसों के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर भी दोनों संतों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। महंत सीताराम दास ने कहा कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा देकर डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मदरसों में नफरत फैलाने वाली शिक्षा दी जाती है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने पश्चिम बंगाल में मदरसों पर हुई कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि जिन संस्थानों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं और जिनकी गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे थे, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं थीं और इस विषय पर व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए।
दोनों संतों ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समाज में सद्भाव, विकास और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करना है और किसी भी प्रकार की कट्टरता या वैमनस्य को बढ़ावा नहीं देना है।
--आईएएनएस
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