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पुरी रथ यात्रा: पवित्र 'अडापा बिजे' रस्म संपन्न, गुंडिचा मंदिर के अडापा मंडप में विराजमान हुए महाप्रभु

पुरी, 18 जुलाई (आईएएनएस)। जगन्नाथ रथ यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठानों में से एक 'अडापा बिजे' की पवित्र रस्म श्रद्धा और परंपरा के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन को उनके रथों से पारंपरिक 'पहंडी' (पोंडी) जुलूस के माध्यम से गुंडिचा मंदिर के भीतर स्थित अडापा मंडप तक ले जाया गया, जहां वे आगामी नौ दिनों तक भक्तों को दर्शन देंगे। पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं।
 

पुरी, 18 जुलाई (आईएएनएस)। जगन्नाथ रथ यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठानों में से एक 'अडापा बिजे' की पवित्र रस्म श्रद्धा और परंपरा के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन को उनके रथों से पारंपरिक 'पहंडी' (पोंडी) जुलूस के माध्यम से गुंडिचा मंदिर के भीतर स्थित अडापा मंडप तक ले जाया गया, जहां वे आगामी नौ दिनों तक भक्तों को दर्शन देंगे। पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं।

जगन्नाथ मंदिर के प्रतिहारी सेवायत नरसिंह प्रतिकार ने बताया कि अडापा बिजे रथ यात्रा का अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। आज भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा अपने जन्मस्थान माने जाने वाले गुंडिचा मंदिर में विराजमान होते हैं। रथ यात्रा के दिन से वे यहां नौ दिनों तक निवास करेंगे, जिसके बाद बहुड़ा यात्रा के माध्यम से श्रीमंदिर लौटेंगे। भगवान जगन्नाथ की सेवा करने का अवसर मिलना करोड़ों पुण्यों के समान अनुभव है। अडापा बिजे से पहले रथों से घोड़ों को हटाया जाता है, फिर नारियल के पेड़ों से बने विशेष चारमाल लगाए जाते हैं, जिनके माध्यम से महाप्रभु को पहांडी शैली में अडापा मंडप तक ले जाकर रत्न सिंहासन पर विराजमान कराया जाता है।

नरसिंह प्रतिकार ने बताया कि इस दिव्य अनुष्ठान में विभिन्न सेवायतों की अहम भूमिका होती है। भगवान के पीछे रहने वाले सेवक, भुजाओं के नीचे सहारा देने वाले दैतापति सेवायत और मार्गदर्शन करने वाले प्रतिहारी सेवायत मिलकर पूरी परंपरा का निर्वहन करते हैं, जिससे सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा जीवंत बनी रहती है।

वहीं, अजय महापात्रा ने अडापा बिजे की पूरी धार्मिक प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि सुबह से ही रथों पर भगवान की सभी पारंपरिक नीतियां, मंगला आरती, अवकाश, गोपाल वल्लभ, सकाल धूप, चंदन लागी, महास्नान, मध्याह्न धूप और संध्या आरती, संपन्न की जाती हैं। संध्या आरती के बाद रथों के घोड़े हटाए जाते हैं, चारमाल लगाए जाते हैं और पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद भगवान की पहांडी यात्रा प्रारंभ होती है। इसके बाद भगवान गुंडिचा मंदिर के अडापा मंडप में विराजमान होते हैं, जहां अगले दिन से श्रद्धालु उनके दर्शन कर सकेंगे।

अडापा बिजे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अधिकारी प्रतीक गीता सिंह ने कहा कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), अग्निशमन विभाग और चिकित्सा टीमों की व्यापक तैनाती की गई है। पूरे क्षेत्र में प्रभावी क्राउड मैनेजमेंट के लिए सुरक्षा बलों को लगाया गया है और विशेष कॉर्डन व्यवस्था के बीच महाप्रभु को सुरक्षित रूप से गुंडिचा मंदिर तक पहुंचाया गया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसी बीच, ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने पुरी रथ यात्रा के दौरान चिकित्सा व्यवस्थाओं का स्वयं निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि वे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की लगातार व्यक्तिगत निगरानी कर रहे हैं। पिछले दिन हुई भारी बारिश के बावजूद भगवान जगन्नाथ की कृपा से तीनों रथ सुरक्षित अपने निर्धारित पड़ाव तक पहुंचे। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि भीड़ के कारण घुटन की शिकायत लेकर कुछ श्रद्धालु अस्पताल पहुंचे थे, जिनकी स्थिति अब सामान्य है और कई मरीजों को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम