पंजाब में ड्रग्स विरोधी एक्टिविस्ट की हत्या पर एनएचआरसी सख्त, प्रियांक कानूनगो बोले-यह कानून-व्यवस्था की विफलता
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ काम करने वाले एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या के मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लिया है। एनएचआरसी के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह कानून-व्यवस्था के पूरी तरह से फेल होने का साफ उदाहरण है।
प्रियांक कानूनगो ने कहा, "पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ काम करने वाले एक एक्टिविस्ट की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना बेहद गंभीर है और दिखाती है कि ड्रग्स बेचने वाले इतने बेखौफ हो गए हैं कि उन्हें कानून-व्यवस्था का कोई डर नहीं है। यह कानून-व्यवस्था न होने का एक साफ उदाहरण है।"
उन्होंने बताया कि आयोग ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी किया है और उनसे रिपोर्ट मांगी है। कानूनगो ने कहा कि एनएचआरसी की कोशिश यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब सहित पूरे देश में नशे के खिलाफ काम करने वाले एक्टिविस्ट्स की जान-माल की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की हो। इसी मकसद से हम पूरे मामले की जांच करेंगे।
प्रियांक कानूनगो ने पंजाब सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को सरकार बर्दाश्त करना बंद कर देती है, तो ऐसी घटनाएं होती हैं। उन्होंने इसके दो उदाहरण भी दिए।
उन्होंने कहा, "एक बार मुख्यमंत्री से जब ड्रग्स के खिलाफ एक व्यक्ति ने बात की तो उसे पीटा गया। एक अन्य मामले में एक व्यक्ति ने वित्त मंत्री की बैठक में ड्रग्स के खिलाफ बात की और कथित तौर पर उसे इतना प्रताड़ित किया गया कि उसने आत्महत्या कर ली।"कानूनगो ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से नशा बेचने वालों के हौसले बुलंद होते हैं। उन्हें लगता है कि सरकार उनके साथ खड़ी है।
उन्होंने कहा, "जब सरकार ड्रग्स के कारोबार में शामिल लोगों का साथ देती हुई दिखती है, तो यह एक गंभीर स्थिति होती है। यहां पर आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। सरकार को यह रणनीति बनानी होगी कि उसे नशा बेचने वालों पर प्रहार करना है, उनके साथ खड़ा नहीं दिखना है।"
--आईएएनएस
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