जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट पृथ्वी पर नजर रखेगा ईओएस-05 सैटेलाइट, मिशन के सफल लॉन्च पर वैज्ञानिकों ने दी बधाई
श्रीहरिकोटा, 4 सितंबर (आईएएनएस) जीएसएलवी-एफ 17/ईओएस-05 मिशन के सफल लॉन्च के बाद मौके पर मौजूद और इस मिशन में अपना योगदान देने वैज्ञानिकों ने लोगों को संबोधित करते बधाई दी।
एलपीएससी के डायरेक्टर जयन एन ने कहा, "जीएसएलवी ने एक और शानदार सफलता हासिल करके अपनी काबिलियत फिर से साबित कर दी है। इस शानदार उपलब्धि में योगदान देने वाले हर व्यक्ति को मेरी ओर से बहुत-बहुत बधाई। लिक्विड प्रोपल्शन टीम की ओर से मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि सभी छह लिक्विड स्टेज - पांच रिस्टोरेबल स्टेज और एक क्रायोजेनिक स्टेज ने एकदम सटीक तरीके से काम किया और सैटेलाइट को उसकी तय कक्षा (ऑर्बिट) में पहुंचाया।"
आईपीआरसी के डायरेक्टर नारायणन अप्पू ने कहा, "आज जीएसएलवी-एफ 17/ईओएस-05 मिशन की सफलता के साथ दिन की कितनी शानदार शुरुआत हुई है, वह भी सूरज उगने से पहले। इसरो की टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे बेहतरीन क्वालिटी और एकदम सटीक तरीके से स्पेस मिशन पूरे करने में माहिर हैं।"
स्पेसक्राफ्ट डायरेक्टर इम्तियाज अहमद ने कहा, "इस शानदार लॉन्च और जीएसएलवी द्वारा अपनी श्रेणी के सबसे भारी और बड़े सैटेलाइट को पूरी सटीकता से कक्षा में पहुंचाने के लिए पूरी इसरो टीम को मेरी ओर से बहुत-बहुत बधाई। ईओएस-05 असल में जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी पर नजर रखने वाला (अर्थ ऑब्जर्वेशन) सैटेलाइट है। यह सैटेलाइट अनोखा और अपनी तरह का इकलौता है, जिसमें मल्टीबैंड ऑपरेटिंग क्षमताएं हैं।"
आईएसटीआरएसी के डायरेक्टर राघवेंद्र एम आर ने कहा, "इस शानदार मिशन को पूरा करने के लिए इसरो की टीम को बधाई। सैटेलाइट को बहुत सटीक ऑर्बिट में स्थापित किया गया है। पूरे मिशन के दौरान, हमारे सात आईएसटीआरएसी ग्राउंड स्टेशनों ने इसे ट्रैक किया। सभी स्टेशनों ने बहुत अच्छा काम किया और बेहतरीन डेटा दिया। स्पेसक्राफ्ट के आगे के सभी ऑपरेशन्स के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।"
एमसीएफ के डायरेक्टर पंकज दामोदर किल्लेदार ने कहा, "स्पेसक्राफ्ट अब ऑर्बिट में है और हमारे नियंत्रण में है। यह मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी के तहत 33वां सैटेलाइट है। लॉन्च टीम को बधाई।"
वीएससी के डायरेक्टर डॉ. राजीव ने कहा, "जीएसएलवी-एफ 17/ईओएस-05 मिशन के सफल लॉन्च पर सभी को हार्दिक बधाई। हमने सटीक ऑर्बिट हासिल कर ली है। यह उपलब्धि इसरो की पूरी टीम के सदस्यों की टीमवर्क की वजह से संभव हो पाई। मैं इसरो चेयरमैन को उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद देता हूं। इसे हासिल करने के लिए इसरो के सभी सेंटर्स ने एक परिवार की तरह काम किया। टीम के सभी सदस्यों ने बहुत त्याग किए। उन्होंने इस मिशन को पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ दिन-रात ओवरटाइम काम किया।"
--आईएएनएस
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