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प्रधानमंत्री मोदी आज भारत मंडपम में आयोजित होने वाले यूपीएससी के शताब्दी समारोह में होंगे शामिल

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के शताब्दी समारोह में भाग लेंगे। वे सुबह करीब 11 बजे कार्यक्रम में पहुंचेंगे। वे इस अवसर पर सभा को संबोधित भी करेंगे।
 

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के शताब्दी समारोह में भाग लेंगे। वे सुबह करीब 11 बजे कार्यक्रम में पहुंचेंगे। वे इस अवसर पर सभा को संबोधित भी करेंगे।

यह कार्यक्रम उन साल भर चलने वाले समारोहों का समापन होगा, जो पिछले साल 1 अक्टूबर से आरंभ हुए थे और 1926 में यूपीएससी की स्थापना के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री यूपीएससी शताब्दी स्मारक सिक्का, एक स्मारक डाक टिकट और 'भारत में यूपीएससी और लोक सेवा आयोगों की नीतियों को आकार देने वाले '100 ऐतिहासिक निर्णय' किताब का विमोचन करेंगे।

इस कार्यक्रम में राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, यूपीएससी अधिकारी और देश भर के अन्य हितधारकों की भागीदारी देखने को मिलेगी।

यह कार्यक्रम यूपीएससी की ओर से 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को आयोजित किए जा रहे दो दिवसीय कार्यक्रम का हिस्सा है। पहले दिन भारत मंडपम में 'शताब्दी समारोह - मंथन' होगा, जिसमें प्रख्यात वक्ताओं के संबोधन के बाद विभिन्न विषयों पर पैनल चर्चा होगी।

गौरतलब है कि 1 अक्टूबर को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के सौ साल पूरे हो रहे हैं। इसकी संस्थागत यात्रा 1 अक्टूबर 1926 को शुरू हुई थी, जब भारत का पहला लोक सेवा आयोग बनाया गया था। यह एक सलाहकार संस्था थी, जिसके चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति लंदन में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट करते थे। इसके बाद की सदी में, आयोग के ढांचे, दर्जे और जिम्मेदारियों में बदलाव आए और यह आज एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बन गया है।

पिछले कुछ वर्षों में यूपीएससी के काम का दायरा और जटिलता काफी बढ़ गई है। परीक्षाओं और चयन के जरिए भर्ती के लिए आवेदन 1950-51 में 42,727 से बढ़कर 2022-23 में 45,10,044 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए - यानी सौ गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी। उस साल, आयोग ने 15 परीक्षाएं आयोजित कीं (33,51,916 आवेदन) और चयन के जरिए भर्ती के तहत 4,411 पदों के लिए 233 अनुरोध प्राप्त किए (11,58,128 आवेदन)।

1949 और 1951 के बीच, भारतीय विदेश सेवा के लिए सिर्फ एक महिला और आईएएस के लिए दो महिलाओं को चुना गया था। 1952 में चुने गए लोगों में महिलाओं की हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत थी और सीएसई 2025 में यह 31.2 प्रतिशत रही, जिसमें उन्होंने टॉप 25 रैंक में से 11 रैंक हासिल कीं।

वर्तमान में आयोग के प्रमुख चेयरमैन अजय कुमार हैं (15 मई 2025 से)। इसके आठ सदस्य हैं, जिनमें लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (रिटायर्ड), सुमन शर्मा, विद्युत बिहारी स्वैन, दिनेश दासा, शील वर्धन सिंह, संजय वर्मा, सुजाता चतुर्वेदी और अनुराधा प्रसाद। इन आठ सदस्यों में से तीन महिलाएं हैं। यह संरचना दिखाती है कि यह संस्था सौ सालों में कितनी आगे बढ़ चुकी है।

--आईएएनएस

डीसीएच/