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पूसा में खरीफ कॉन्फ्रेंस: 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक मंच पर, कृषि सुधारों को मिला राष्ट्रीय संकल्प

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र पूसा में 28 और 29 मई को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में देश के कृषि क्षेत्र से जुड़ा एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। इस कार्यक्रम में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर पहुंचे और देश की कृषि व्यवस्था को मजबूत करने व किसानों की स्थिति सुधारने का सामूहिक संकल्प लिया।
 
पूसा में खरीफ कॉन्फ्रेंस: 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक मंच पर, कृषि सुधारों को मिला राष्ट्रीय संकल्प

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र पूसा में 28 और 29 मई को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में देश के कृषि क्षेत्र से जुड़ा एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। इस कार्यक्रम में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर पहुंचे और देश की कृषि व्यवस्था को मजबूत करने व किसानों की स्थिति सुधारने का सामूहिक संकल्प लिया।

यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं रहा बल्कि इसे कृषि सुधारों के लिए एक राष्ट्रीय मंथन मंच के रूप में देखा गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पहले दिन वरिष्ठ अधिकारियों ने खरीफ सीजन की तैयारियों, बीज, उर्वरक, जल प्रबंधन और फसल योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। दूसरे दिन राज्यों के कृषि मंत्रियों ने इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए रात तक मंथन किया और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझा सहमति बनाई।

सम्मेलन में सबसे खास बात यह रही कि कृषि मंत्रियों ने केवल नीतिगत स्तर पर ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी प्राकृतिक खेती को अपनाने का संकल्प लिया। शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों से अपील की कि वे अपने-अपने स्तर पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें, ताकि किसानों के सामने एक व्यवहारिक उदाहरण प्रस्तुत किया जा सके। इस पहल को कृषि क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ को भी प्रमुखता दी गई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेत बचाने का अर्थ केवल जमीन की रक्षा नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण, मिट्टी की गुणवत्ता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग रोकना जरूरी है और इसके लिए वैज्ञानिक तरीके से जागरुकता अभियान चलाया जाएगा।

सम्मेलन में यह भी तय किया गया कि कृषि सुधारों को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि उन्हें जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा। इसके लिए केंद्र, राज्य सरकारों, कृषि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर सहमति बनी। साथ ही, यह भी कहा गया कि इन सभी योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित किया जाएगा।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि खरीफ रणनीति अब केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होगी बल्कि इसमें दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, मिट्टी की सेहत सुधार और किसानों की आय बढ़ाने जैसे लक्ष्य भी शामिल होंगे। उन्होंने यह संदेश दिया कि कृषि को अब केवल एक विभागीय विषय के रूप में नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए।

सम्मेलन के समापन पर शिवराज सिंह चौहान ने सभी प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की और कहा कि इस तरह का समर्पण बहुत कम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि बड़ा लक्ष्य पाने के लिए केवल बड़ा पद नहीं बल्कि बड़ा संकल्प जरूरी होता है। यह संदेश पूरे सम्मेलन की भावना का केंद्र बन गया।

यह दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस इस बात का संकेत है कि भारत कृषि क्षेत्र में एक नए बदलाव की ओर बढ़ रहा है, जहां नीति निर्माण से लेकर जमीनी स्तर तक सभी को एक साझा लक्ष्य के साथ जोड़ा जा रहा है। सम्मेलन में लिए गए निर्णय आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं और किसानों की स्थिति को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

--आईएएनएस

एसएचके/पीएम