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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ जब गांधी परिवार के रहे 'खट्टे' रिश्ते

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के 14वें प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह के नेतृत्व में अभूतपूर्व विकास और प्रगति का एक दशक बीता। उनके नेतृत्व में भारत ने अपने इतिहास की सबसे उच्च विकास दर हासिल की और लगभग दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गई। मनमोहन सिंह के पदभार संभालने के समय भारत की अर्थव्यवस्था 10वें स्थान पर थी लेकिन 2014 तक यह विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। इसमें कोई दोराय नहीं है कि यह सब उनके निर्णयों के कारण संभव हुआ।
 

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के 14वें प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह के नेतृत्व में अभूतपूर्व विकास और प्रगति का एक दशक बीता। उनके नेतृत्व में भारत ने अपने इतिहास की सबसे उच्च विकास दर हासिल की और लगभग दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गई। मनमोहन सिंह के पदभार संभालने के समय भारत की अर्थव्यवस्था 10वें स्थान पर थी लेकिन 2014 तक यह विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। इसमें कोई दोराय नहीं है कि यह सब उनके निर्णयों के कारण संभव हुआ।

26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत (अब पाकिस्तान) में जन्मे मनमोहन सिंह के 10 साल के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान दोनों के बीच सरकार और संगठन के स्तर पर तालमेल तो देखने को मिला लेकिन कई बार नीतिगत मामलों पर शुरुआती असहमति भी देखी गई।

मनमोहन सिंह के फैसलों से राहुल गांधी की नाराजगी भी इसका एक उदाहरण है। राहुल गांधी के साथ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के संबंधों में उस समय सबसे अधिक तनाव या असहजता देखी गई, जब साल 2013 में राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह सरकार के एक अध्यादेश को सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने फाड़ दिया था।

राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूपीए सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल के दौरान विभिन्न नीतिगत मामलों पर असहमतियां तो रहीं लेकिन राहुल गांधी की ओर से अध्यादेश फाड़े जाने की घटना को उनके कार्यकाल का सबसे चर्चित असहज क्षण माना जाता है।

सरकार का यह अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को पलटने के लिए था। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जिन सांसदों और विधायकों को कम से कम दो साल की सजा होगी, उन्हें तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा और उन्हें अपील करने के लिए तीन महीने का समय नहीं मिलेगा, जैसा कि पहले मिलता था।

राहुल गांधी ने उस अध्यादेश को 'पूरी तरह बकवास' बताया था। उनके इस कदम को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए भारी शर्मिंदगी के तौर पर देखा गया। 2004 में पद संभालने के बाद से ही भाजपा उन्हें गांधी परिवार के 'कठपुतली' के तौर पर निशाना बनाती रही थी।

यूपीए के 10 साल के शासनकाल में भाजपा ने बार-बार आरोप लगाया कि सरकार में लीडरशिप का ढांचा साफ नहीं था और मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री होने के बावजूद कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी ही बड़े फैसले ले रहे थे। हालांकि, इसके बावजूद मनमोहन सिंह और कांग्रेस नेतृत्व (विशेषकर सोनिया गांधी) के बीच के राजनीतिक तालमेल और समझदारी के कारण सरकार के भीतर बड़े टकराव की स्थिति नहीं बनी।

एक घटनाक्रम यह भी है कि 26 दिसंबर 2024 को मनमोहन सिंह के निधन के बाद उनके अस्थि विसर्जन के समय गांधी परिवार या कांग्रेस का कोई भी शीर्ष नेता मौजूद नहीं था। हालांकि, इस पर बाद में सफाई दी गई कि परिवार की निजता का सम्मान करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उनके परिवार के साथ नहीं गए थे।

--आईएएनएस

डीसीएच/पीएम