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पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ ओखा में भारतीय तटरक्षक पोत ‘मीरा बेन’ का डी-कमीशनिंग समारोह सम्पन्न

ओखा, 22 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय तटरक्षक बल के गौरवशाली इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय उस समय पूर्ण हुआ, जब भारतीय तटरक्षक पोत आईसीजीएस मीरा बेन को ओखा बंदरगाह पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ औपचारिक रूप से सेवा से मुक्त (डी-कमीशन्ड) कर दिया गया। इस पारंपरिक एवं गरिमामय समारोह में पोत को अंतिम विदाई दी गई।
 

ओखा, 22 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय तटरक्षक बल के गौरवशाली इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय उस समय पूर्ण हुआ, जब भारतीय तटरक्षक पोत आईसीजीएस मीरा बेन को ओखा बंदरगाह पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ औपचारिक रूप से सेवा से मुक्त (डी-कमीशन्ड) कर दिया गया। इस पारंपरिक एवं गरिमामय समारोह में पोत को अंतिम विदाई दी गई।

यह समारोह कोस्ट गार्ड जिला मुख्यालय संख्या-15, ओखा के कमांडर उप महानिरीक्षक (डीआईजी) मनजीत सिंह गिल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस अवसर पर नागरिक एवं सैन्य गणमान्य व्यक्तियों, पोत के कमांडिंग अधिकारी कमांडेंट थिंकल थाराकन, चालक दल के सदस्यों तथा ओखा में तैनात विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

आईसीजीएस मीरा बेन का नाम महात्मा गांधी की समर्पित शिष्या और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रमुख हस्ती मीरा बेन के सम्मान में रखा गया था। गांधीवादी विचारों से प्रेरित मीरा बेन ने अपना जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित कर दिया था। उनकी निष्ठा और सेवा भावना से प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने उन्हें महान संत-कवयित्री मीराबाई के नाम पर ‘मीरा’ नाम प्रदान किया था।

समारोह की शुरुआत एक प्रभावशाली गार्ड ऑफ ऑनर परेड से हुई। सूर्यास्त के समय पोत से भारतीय तटरक्षक ध्वज को अंतिम बार उतारा गया, जो उसके गौरवशाली सेवाकाल की औपचारिक समाप्ति का प्रतीक बना। इसके बाद डी-कमीशनिंग पेनेंट को भी उतारा गया। इस भावुक क्षण के साथ ही दो दशकों से अधिक समय तक देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने वाले इस पोत का सक्रिय सफर समाप्त हो गया।

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित आईसीजीएस मीरा बेन को 25 जुलाई 2006 को भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया था। यह जल-प्रणोदित एक्स्ट्रा फास्ट पेट्रोल वेसल श्रृंखला का हिस्सा था, जो अपनी उच्च गति और परिचालन दक्षता के लिए जाना जाता है। अपने सेवाकाल के दौरान इस पोत ने समुद्री सुरक्षा, निगरानी, खोज एवं बचाव अभियानों तथा राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

समारोह के दौरान कमांडिंग अधिकारी कमांडेंट (जेजी) थिंकल थाराकन ने अपना अंतिम डी-कमीशनिंग प्रतिवेदन डीआईजी मनजीत सिंह गिल को प्रस्तुत किया, जिसके साथ ही पोत की सक्रिय सेवा औपचारिक रूप से समाप्त घोषित कर दी गई।

डीआईजी मनजीत सिंह गिल ने अपने संबोधन में आईसीजीएस मीरा बेन की उल्लेखनीय सेवाओं को याद करते हुए कहा कि यह पोत भारतीय तटरक्षक बल की क्षमता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक रहा है। उन्होंने जहाज पर वर्षों तक सेवा देने वाले सभी अधिकारियों एवं नाविकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि मीरा बेन ने दो दशकों तक राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा में उत्कृष्ट और अनुकरणीय भूमिका निभाई है।

आईसीजीएस मीरा बेन की विदाई न केवल एक पोत के सेवामुक्त होने का अवसर था, बल्कि उन सभी सैनिकों और नाविकों की निष्ठा एवं समर्पण को सम्मान देने का भी क्षण था, जिन्होंने इस जहाज को भारतीय तटरक्षक बल की एक गौरवशाली पहचान बनाया।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी