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पीओके में हिंसा पर यूएन से हस्तक्षेप की मांग, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने उठाई आवाज

बरेली, 12 जून (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात (एआईएमजे) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है।
 
पीओके में हिंसा पर यूएन से हस्तक्षेप की मांग, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने उठाई आवाज

बरेली, 12 जून (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात (एआईएमजे) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अपने अधिकारों और बढ़ती महंगाई के खिलाफ आवाज उठाने वाले नागरिकों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कार्रवाई की गई, जिससे आम लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

इसके साथ ही उन्होंने गाजियाबाद में जिम ट्रेनरों के पुलिस सत्यापन अभियान का समर्थन करते हुए महिलाओं के लिए अलग जिम स्थापित करने का सुझाव भी दिया।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में रहने वाले लोग लंबे समय से अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान आम नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, जिससे कई लोगों की जान गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई और अन्य जनसमस्याओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सेना ने कठोर कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं गंभीर मानवाधिकार चिंताओं को जन्म देती हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए।

मौलाना ने संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें इस मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए तथा तथ्यों को दुनिया के सामने लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो संगठन मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करते हैं, उन्हें पीओके की स्थिति का अध्ययन कर वहां के लोगों की समस्याओं और कथित उत्पीड़न को वैश्विक मंच पर उठाना चाहिए।

इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में जिम ट्रेनरों के पुलिस वेरिफिकेशन अभियान पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। मौलाना ने कहा कि किसी भी व्यवसाय या सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों का सत्यापन होना प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है और इससे पारदर्शिता तथा सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन के पास यह जानकारी होनी चाहिए कि कौन व्यक्ति किस क्षेत्र में कार्य कर रहा है और उसकी पृष्ठभूमि क्या है। उनके अनुसार ऐसे कदम कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और नागरिकों का भरोसा बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।

महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के संदर्भ में उन्होंने सुझाव दिया कि महिलाओं के लिए अलग जिम स्थापित किए जाने चाहिए, जहां प्रशिक्षण का कार्य महिला प्रशिक्षकों द्वारा किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे जिम में पुरुषों के प्रवेश पर प्रतिबंध होना चाहिए, जिससे महिलाएं अधिक सहज और सुरक्षित वातावरण में फिटनेस गतिविधियों में भाग ले सकें। इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी