पॉडकास्ट टिप्पणी विवाद : बीएन शर्मा ने स्वीकार की गलती, वाल्मीकि समाज से मांगी क्षमा
अमृतसर, 3 जून (आईएएनएस)। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेता और कमीडियन बीएन. शर्मा ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान हुई विवादित टिप्पणी को लेकर वाल्मीकि समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। बुधवार को वह अपने परिवार और साथियों के साथ अमृतसर स्थित वाल्मीकि तीर्थ स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने माथा टेककर अपनी गलती स्वीकार की और समाज से क्षमा मांगी।
दरअसल, कुछ दिनों पहले एक पॉडकास्ट में भगवान वाल्मीकि के सम्मान से जुड़े कथित बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस टिप्पणी के बाद वाल्मीकि समाज के लोगों ने नाराजगी जताई थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वाल्मीकि तीर्थ एक्शन कमेटी ने अमृतसर के पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी।
विवाद बढ़ने के बाद बी.एन. शर्मा ने समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात करने और अपनी बात स्पष्ट करने का फैसला किया। वाल्मीकि तीर्थ पहुंचकर उन्होंने कहा, "पॉडकास्ट के दौरान मुझसे अनजाने में ऐसी बात निकल गई, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। उनका किसी भी धर्म, समाज या महापुरुष का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था।"
बी.एन. शर्मा ने कहा कि एक कलाकार होने के नाते उनका उद्देश्य हमेशा लोगों का मनोरंजन करना और समाज को सकारात्मक संदेश देना रहा है। यदि उनकी किसी बात से किसी को ठेस पहुंची है तो वह इसके लिए दिल से माफी मांगते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका पूरा परिवार इस अवसर पर उनके साथ मौजूद है और सभी की ओर से वाल्मीकि समाज से माफी मांगते हैं।
उन्होंने वाल्मीकि समाज के नेताओं और प्रतिनिधियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि समाज को जोड़ने और भाईचारे को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने विशेष रूप से उन लोगों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने संवाद और समझदारी के जरिए इस विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने में सहयोग दिया।
बीएन. शर्मा ने महर्षि वाल्मीकि के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि वह हमेशा उनका सम्मान करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने समाज से अपील की कि यदि भविष्य में किसी से ऐसी गलती हो जाए तो उसे सुधारने का अवसर जरूर दिया जाए।
वहीं, वाल्मीकि समाज ने भी बड़ा दिल दिखाते हुए बी.एन. शर्मा की माफी स्वीकार कर ली। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी के खिलाफ कार्रवाई करवाना नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करना था। माफी स्वीकार किए जाने के बाद यह विवाद शांत हो गया।
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