पीएमएमएसवाई से बदली पलामू की तस्वीर: मछली उत्पादन से बढ़ी आय, सरकार का जताया आभार
पलामू, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। झारखंड के पलामू जिले में इस योजना के तहत बायोफ्लॉक तकनीक ने मछली पालन को नई दिशा दी है। पानी की कमी वाले इलाकों में भी अब सीमित जगह और कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो पाया है, जिससे छोटे किसानों और मछुआरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
पलामू जिला लंबे समय से पानी की कमी से जूझ रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत स्थापित आरएस बायोफ्लॉक टैंक ने यहां मछली उत्पादन की नई पहचान बनाई है। खासकर चैनपुर क्षेत्र में इस तकनीक का व्यापक प्रभाव दिख रहा है।
योजना के लाभार्थी मुकेश कुमार ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "इस योजना की शुरुआत लगभग छह साल पहले हुई थी। बायोफ्लॉक टैंक के माध्यम से कम पानी में अधिक मछली उत्पादन हो रहा है। पहले मरी हुई मछली 100 रुपए प्रति किलो बिकती थी, अब जीवित मछली 200 रुपए प्रति किलो तक बिक रही है। इससे हमारी आमदनी में लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।"
मुकेश कुमार ने आगे कहा कि वे चाहते हैं कि आदिवासियों की तरह ओबीसी वर्ग के किसानों को भी 90 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ मिले, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना से जुड़ सकें।
योजना के तहत लाभार्थियों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और कच्चे माल की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। दूसरे लाभार्थी शशिकांत गुप्ता ने बताया, "पहले मछली पालन के लिए फीड आंध्र प्रदेश, बंगाल और छत्तीसगढ़ से मंगवाना पड़ता था, जिससे लागत बढ़ जाती थी। अब स्थानीय स्तर पर फीड उपलब्ध होने से परिवहन खर्च कम हो गया है और उत्पादन भी आसान हो गया है। कम पूंजी में व्यवसाय शुरू करने वाले लोगों के लिए यह योजना बेहद लाभकारी साबित हो रही है।"
बायोफ्लॉक तकनीक में बैक्टीरिया की मदद से मछली के अपशिष्ट को पोषक तत्वों में बदला जाता है, जो मछलियों के लिए प्राकृतिक भोजन का काम करता है। इससे पानी को बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती और उत्पादन लागत काफी कम हो जाती है। पलामू में यह तकनीक सूखा प्रभावित क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो रही है।
केंद्र सरकार की इस योजना ने न केवल मछली उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्रदान किए हैं। पलामू के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ मछली पालन को अतिरिक्त आय का जरिया बना रहे हैं।
--आईएएनएस
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