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पीएम मोदी ओडिशा में भारत के पहले कमर्शियल-स्केल कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की रखेंगे आधारशिला

नई दिल्ली, 19 जून (आईएएनएस)। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयात कम करने और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को ओडिशा के झारसुगुडा जिले के लखनपुर में 25,016 करोड़ रुपए के कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे। शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी साझा की गई है।
 
पीएम मोदी ओडिशा में भारत के पहले कमर्शियल-स्केल कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की रखेंगे आधारशिला

नई दिल्ली, 19 जून (आईएएनएस)। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयात कम करने और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को ओडिशा के झारसुगुडा जिले के लखनपुर में 25,016 करोड़ रुपए के कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे। शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी साझा की गई है।

बयान में कहा गया है कि लखनपुर प्रोजेक्ट भारत की पहली कमर्शियल-स्केल कोयले से अमोनियम नाइट्रेट बनाने वाली सुविधा के तौर पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह प्रोजेक्ट भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (बीसीजीसीएल) द्वारा विकसित किया जा रहा है, जो भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) और कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का जॉइंट वेंचर है। यह प्रोजेक्ट बीएचइएल द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित कोयला गैसीफिकेशन तकनीक का इस्तेमाल करके हर दिन 2,000 टन अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन करेगा।

यह प्रोजेक्ट भविष्य के कोयला गैसीफिकेशन वेंचर्स के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करेगा और भारत के आत्मनिर्भर मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल पावरहाउस बनने के विज़न में अहम योगदान देगा। लखनपुर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखना स्वच्छ कोयला तकनीकों को बढ़ावा देने, घरेलू संसाधनों से ज्यादा से ज्यादा वैल्यू हासिल करने और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन के अनुरूप एक मजबूत इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

बयान के मुताबिक, कोल गैसीफिकेशन भारत की उस रणनीति का एक अहम हिस्सा बन रहा है जिसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, आयातित जरूरी कच्चे माल पर निर्भरता कम करना, घरेलू कोयला संसाधनों से बनने वाले उत्पादों का मूल्य बढ़ाना और डाउनस्ट्रीम उद्योगों के विकास में मदद करना है।

इस प्रक्रिया में कोयले को सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में बदला जाता है, जिसका इस्तेमाल मेथनॉल, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, सिंथेटिक नेचुरल गैस और अन्य केमिकल फीडस्टॉक जैसे कई तरह के मूल्य-वर्धित उत्पाद बनाने में किया जा सकता है। इसमें औद्योगिक विकास को गति देने, आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम करने और देश की ऊर्जा व आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की क्षमता है।

बयान के अनुसार, भारत दुनिया में कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है, और कोल इंडिया लिमिटेड दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है। भारत के पास दुनिया का 5वां सबसे बड़ा कोयला भंडार है, जो 400 बिलियन टन से भी अधिक है। कोल गैसीफिकेशन के जरिए इन संसाधनों का सही इस्तेमाल करके देश के औद्योगिक परिदृश्य को काफी हद तक बदला जा सकता है, साथ ही जरूरी फीडस्टॉक और केमिकल के लिए आयात पर निर्भरता भी कम की जा सकती है।

कोल गैसीफिकेशन की बदलाव लाने वाली क्षमता को देखते हुए, भारत सरकार ने देश भर में सरफेस कोल और लिग्नाइट गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए कुल 46,000 करोड़ रुपए तक की प्रोत्साहन योजनाओं को मंजूरी दी है, जिसका मकसद देश भर में कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स की स्थापना में तेजी लाना, रणनीतिक औद्योगिक और केमिकल उत्पादों के लिए घरेलू कोयले के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और नेचुरल गैस, मेथनॉल, अमोनिया व अन्य जरूरी फीडस्टॉक के आयात पर निर्भरता कम करना है।

बयान में आगे कहा गया है कि भारत अभी हर साल लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपए मूल्य के अंतिम-उपयोग और इंटरमीडिएट केमिकल उत्पादों का आयात करता है। कोल गैसीफिकेशन इन आयातों को कम करने, विदेशी मुद्रा की काफी बचत करने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ औद्योगिक विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का एक बड़ा मौका देता है।

कोयला गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने की इस पहल से 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश आने और कोयला-उत्पादक क्षेत्रों में 25 प्रोजेक्ट्स के जरिए लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

--आईएएनएस

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