पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरे से रणनीतिक व आर्थिक संबंधों को मिलेगा नया आयाम
नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा पर निकले हैं। इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान भारत दोनों देशों के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर जोर देगा। प्रधानमंत्री मोदी के इन दौरों के कई मायने हैं। ऑस्ट्रेलिया में महासागर और हिंद-प्रशांत विजन एक अहम मुद्दा रहेगा। वहीं, न्यूजीलैंड में मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए), व्यापार और निवेश पर अहम फोकस है।
पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया के तीसरे दौरे पर रहेंगे। पीएम मोदी 12 साल के अंतराल के बाद मेलबर्न जा रहे हैं। उनका मेलबर्न का पिछला दौरा नवंबर 2014 में हुआ था और ऑस्ट्रेलिया का उनका आखिरी दौरा मई 2023 में हुआ था। यह दौरा भू-राजनीतिक तौर पर अहम होगा। यह दो क्वाड साझेदारों के बीच संबंधों को और मजबूत करेगा जो हिंद-प्रशांत में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं और लोगों और देशों, खासकर छोटे आइलैंड डेवलपिंग स्टेट्स के लिए नए मौके और खुशहाली लाएगा।
तय प्रोटोकॉल से हटकर ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन एसी पीएम मोदी से मिलने के लिए मेलबर्न जाएंगी, जो हमारे आपसी संबंधों की परिपक्वता को दिखाता है।
पीएम सीईओ फोरम को संबोधित करेंगे। इससे आर्थिक संबंधों को काफी बढ़ावा मिलेगा। 2026 भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम बढ़ते आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाएगा और सभी क्षेत्रों में व्यापार और निवेश में ऑस्ट्रेलिया-भारत सहयोग को लागू करने में मदद करेगा।
ऑस्ट्रेलिया नई शिक्षा नीति के तहत मुख्य साझेदार है। फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी भारत में कैंपस खोलने की मंजूरी पाने वाली सबसे नई ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटी बन गई है। इसके साथ ही आठ ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटी को अब पूरे भारत में कैंपस खोलने की मंजूरी मिल गई है।
पीएम एक बड़े सामुदायिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय हमारे द्विपक्षीय संबंध का एक जरूरी स्तंभ बन गया है। अब सभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों में भारतीय मूल के लोग लगभग 1 मिलियन हैं। भारतीय समुदाय ऑस्ट्रेलिया का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा डायस्पोरा समुदाय है।
न्यूजीलैंड दौरे की बात करें तो प्रधानमंत्री मोदी पिछले 40 साल में न्यूजीलैंड जाने वाले पहले पीएम हैं। प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड दौरा 40 साल के अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा होगा। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब हाल ही में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं।
एक ही मार्केट पर बहुत ज्यादा निर्भरता के कारण न्यूजीलैंड की तरफ से अपनी आर्थिक साझेदारी को अलग-अलग तरह का बनाने की बहुत ज्यादा इच्छा है।
न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के लगभग 3,00,000 से ज्यादा लोग रहते हैं, जो भारत के साथ गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं और न्यूजीलैंड की राजनीति, अर्थव्यवस्था और बिजनेस में अहम भूमिका निभाते हैं। यह दौरा न्यूजीलैंड में हमारे समुदाय के योगदान का जश्न मनाने का मौका देगा।
न्यूजीलैंड के साथ अभी द्विपक्षीय व्यापार 2.25 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। एफटीए और लगभग टैरिफ-फ्री व्यावसायिक माहौल के साथ व्यापार में तेजी से बढ़ोतरी की बहुत संभावना है। दोनों देश 2030 तक सामान और सर्विस में अपने व्यापार को दोगुना करने का भी लक्ष्य बना रहे हैं। अगले 15 साल में भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश का एफटीए प्रोविजन मजबूत आर्थिक साझेदारी के लिए एक ड्राइविंग फोर्स का काम करेगा।
न्यूजीलैंड अपनी जीडीपी का लगभग 1.5 फीसदी आरएंडडी पर खर्च करता है और उसने डेयरी, खेती, हाई परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स वगैरह जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतरीन काम किया है। भारत न्यूजीलैंड के साथ साझेदारी करने की कोशिश कर रहा है ताकि उनके बेस्ट प्रैक्टिस और इनोवेशन से सीखकर भारतीय क्षेत्रों को मजबूत कर सकें। न्यूजीलैंड भारत में कीवी फ्रूट एक्शन प्लान, एप्पल और नाशपाती एक्शन प्लान और हनी एक्शन प्लान लॉन्च करने की प्रक्रिया में है और नगालैंड और उत्तराखंड में कीवी फ्रूट में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बना रहा है। भारत स्पोर्ट्स में जॉइंट एक्शन प्लान के जरिए स्पोर्ट्स में भी इसी तरह के सहयोग पर बात कर रहा है।
--आईएएनएस
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