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पीएम मोदी और इटली की पीएम को लेकर की गई टिप्पणी पर नेताओं ने राहुल गांधी को घेरा, बोले-अब वे नौटंकी कर रहे

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से की गई टिप्पणियों पर भाजपा नेताओं ने उन पर हमला बोला है।
 

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से की गई टिप्पणियों पर भाजपा नेताओं ने उन पर हमला बोला है।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि राहुल गांधी को पता ही नहीं है कि हमारी भारतीय संस्कृति क्या है? उनकी ओर से आधी आबादी और मातृशक्ति का अपमान करना अशोभनीय और निंदनीय है। उनकी इस हरकत से हमें यही लग रहा है कि राहुल गांधी अभी भी परिपक्व नहीं हो पाए हैं। आने वाले वक्त में लोकतंत्र जवाब दे देगा, क्योंकि कहीं भी जनता अपमान सहन नहीं कर सकती है। अगर वे भारत मां की संतान होते, तो उनके मन से ऐसा कोई शब्द नहीं निकलता।

प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि प्रियंका गांधी को नारियों का सम्मान करने के लिए भाई को समझाना चाहिए। हमारा कहना है कि विपक्ष के नेता के तौर पर उनको सशक्त होना चाहिए और इस तरह से वे अशोभनीय भाषा का प्रयोग करके लोकतंत्र का अपमान कर रहे हैं। विदेश नीति के माध्यम से प्रधानमंत्री ने देश का मान बढ़ाया है। अगर राहुल गांधी को परिपक्व राजनीति करनी है तो वे नीतियों का विरोध करें, उसका खंडन करें।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि राहुल गांधी को सुनता कौन है? 2029 में वे और कम होने वाले हैं। राहुल गांधी अब नौटंकी कर रहे हैं, उनको देखना चाहिए कि वे क्या बोल रहे हैं और क्या कर रहे हैं।

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा, "हमें राहुल गांधी से ऐसे निचले स्तर के व्यवहार की उम्मीद नहीं थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद एक संवैधानिक पद है। जो विपक्ष का नेता भारत की गरिमा का सम्मान नहीं कर सकता और संवैधानिक ढांचे का पालन नहीं कर सकता, वह विदेश में ऐसे व्यवहार और आचरण से केवल इस पद का कद ही घटा रहा है। हमें उम्मीद थी कि राहुल गांधी सोच-समझकर काम करेंगे और भारत के संविधान तथा उसकी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदारी से व्यवहार करेंगे।"

बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, "सामाजिक या राजनीतिक जीवन में शामिल किसी भी व्यक्ति को, खासकर जो किसी सम्मानित या संवैधानिक पद पर हो, मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे उनकी अपनी और दूसरों की गरिमा बनी रहे। ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से बचना चाहिए जिनसे लोगों की भावनाएं आहत हों।"

--आईएएनएस

एसडी/पीएम